उज्जैन (घट्टिया) दिपांशु जैन संवाददाता –तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नजरपुर में अनुसूचित जनजाति वर्ग के समाज को वर्ष 1950 से संवैधानिक एवं अनुषंगिक लाभ निर्विघ्नं रूप से प्राप्त हो रहा है। लेकिन विगत माह से एसडीएम संजीव साहू के पदस्थ होने के बाद से वर्तमान आज तक भी जनजाति समाज के लोगों को जाति प्रमाण- पत्र बनाकर नहीं दिए जा रहे हैं। जबकि यही जाती प्रमाण- पत्र पूर्व में ऑफलाइन जारी किए गए हैं। जोकि पूर्व एसडीएम द्वारा बनाए हुए हैं। उन प्रमाण- पत्रों को वर्तमान एसडीएम संजीव साहू द्वारा ऑनलाइन नहीं किया जा रहा है। जानकारी अनुसार ग्रामीण भंवरसिंह डाबी, शंभूसिंह चौहान, करणसिंह डाबी सहित अन्य ने बताया कि हाल ही में एसडीएम संजीव साहू द्वारा अपनी मनमानी के चलते ग्राम नजरपुर निवासी राजेश पिता मोहन डाबी का जाति प्रमाण- पत्र नहीं बनाने के कारण बालक का नवोदय विद्यालय में प्रवेश नहीं हो पाया है। जबकि राजेश के ही भाई- बहन रविराज, पूजा और नीलेश के जाति प्रमाण- पत्र पूर्व एसडीएम द्वारा जारी किए गए हैं। साथ ही राजेश के तीनों भाई- बहन वर्तमान में नवोदय विद्यालय में अध्यनरत भी है, लेकिन राजेश का जाति प्रमाण- पत्र वर्तमान एसडीएम साहू द्वारा जारी नहीं करने के कारण राजेश का इस वर्ष नवोदय में एडमिशन नहीं हो सका। ग्रामीणों ने कहा कि एसडीएम साहू की अपनी मनमानी का खामियाजा विद्यार्थी को भूगतने के साथ उसके भविष्य से भी खिलवाड़ किया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अनेक विद्यार्थियों का ऐसे ही भविष्य अंधकार में हो रहा है। ग्रामीणों ने गंभीर और बड़ी समस्या को लेकर भाजपा की विकास यात्रा के दौरान तहसीलदार देवकुंवर सोलंकी को जाति प्रमाण- पत्र जारी नहीं करने के संबंध में समाज के लोगों द्वारा करीब 16 आवेदन सौंपकर प्रमाण- पत्र जारी करवाने की मांग की है। साथ ही ग्रामीणों ने कहा कि उपरोक्त सभी आवेदनों में 1950 के राजस्व रिकॉर्ड न्यायलय आदेश और प्रति प्रमाण- पत्र में परिवार के भाई- बहन का पूर्व में जारी किए जाती प्रमाण- पत्र भी संलग्न किए है।
विकास यात्रा में मोंगिया समाज के लोगों द्वारा कुछ आवेदन मिले हैं, जिनमें इनके बच्चों के जाती प्रमाण- पत्र नहीं बनें हैं, इनके जाती प्रमाण- पत्र क्यों नहीं बन रहें हैं, इस मामले को एसडीएम के समक्ष रखकर निराकरण करते हैं। साथ ही जिनके प्रमाण- पत्र बनें उन्हें दिखवाकर उनके आधार पर ही इनके भी बनाए जाएंगे।
देवकुंवर सोलंकी, तहसीलदार, घट्टिया
