Cyclone Fengal Update: उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड शुरू हो चुकी है, लेकिन देश के एक हिस्से में भारी बारिश का दौर जारी है. इस बीच बंगाल की खाड़ी से उठे एक तूफान ने चिंता और बढ़ा दी है. दरअसल, तमिलनाडु में इनदिनों बेमौसम बारिश हो रही है. पिछले कई दिनों से जारी बारिश का दौर अभी भी थम नहीं रहा लेकिन अब बंगाल की खाड़ी से उठे फेंगल तूफान ने हर किसी की चिंताएं बढ़ा दी है. मौसम विभाग की मानें तो तमिलनाडु में हो रही बारिश ‘तूफान फेंगल’ के चलते ही हो रही है.|
आज उठेगा तूफान फेंगल
भारत मौसम विज्ञान विभाग की मानें तो बुधवार को बंगाल की खाड़ी से एक चक्रवाती तूफान उठने वाला है, जो अगले दो दिनों में तमिलनाडु के तट से टकराएगा. आईएमडी के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी भाग में एक दबाव क्षेत्र बन रहा है. जिसके चलते मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है. मौसम विभाग की मानें तो ये दबाव का क्षेत्र आने वाले समय में और तीव्र होकर तूफान में बदल जाएगा. इस तूफान को ‘फेंगल’ नाम दिया गया है.|
इन राज्यों में पड़ेगा फेंगल का सबसे ज्यादा असर, स्कुल कॉलेज बंद
मौसम विभाग के मुताबिक, फेंगल तूफान का सबसे ज्यादा असर तमिलनाडु, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश में देखने को मिलेगा. इसके प्रभाव से इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में भारी से लेकर बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. इस दौरान तेज तूफानी हवाएं भी चलेंगी., तमिलनाडु के कई इलाकों में मंगलवार से ही भारी बारिश हो रही है. प्रशासन भी तूफान फेंगल से निपटने की तैयारियों में लगा है. तूफान की गंभीरता को देखते हुए तमिलनाडु के त्रिची, रामनाथपुरम, नागपट्टिनम, कुड्डालोर, विल्लुपुरम और तिरुवल्लूर जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं.
कैसे रखे जाते हैं साइक्लोन या चक्रवातों के नाम?
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक, मौसम पूर्वानुमानकर्ता भ्रम से बचने के लिए प्रत्येक उष्णकटिबंधीय चक्रवात को एक नाम देते हैं। आम तौर पर, उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का नाम क्षेत्रीय स्तर पर नियमों के अनुसार रखा जाता है। हिंद महासागर क्षेत्र के लिए, चक्रवातों के नामकरण के लिए 2004 में एक सूत्र पर सहमति बनी थी। इस क्षेत्र के 13 देशों ने नामों का एक सेट दिया, जो चक्रवाती तूफान आने पर एक के बाद एक दिए जाते हैं। चक्रवातों के नाम चुनते वक्त यह ध्यान रखा जाता है कि वे आसानी से याद रहें, उनका उच्चारण भी आसान हो और वे आपत्तिजनक या विवादास्पद न हों। इनके नामों को विभिन्न भाषाओं से भी चुना जाता है ताकि अलग-अलग इलाकों में रहने वाले लोग इनसे परिचित हों।
‘फेंगल’ नाम का प्रस्ताव कैसे रखा गया?
चक्रवातों के नामों की मौजूदा लिस्ट 2020 में तैयार की गई थी, जिसमें प्रत्येक सदस्य राज्य 13 नामों का योगदान देता है। इन नामों का इस्तेमाल रोटेशन में किया जाता है। किसी भी नाम का दोबारा इस्तेमाल नहीं होता है यानी कि हिंद महासागर क्षेत्र में आया हर चक्रवात अलग नाम से जाना जाता है। उदाहरण के लिए, ‘फेंगल’ नाम का सुझाव सऊदी अरब ने दिया था। इसके बाद अब जो भी अगला चक्रवात आएगा उसका नाम ‘शक्ति’ रखा जाएगा और इस नाम को श्रीलंका ने सुझाया है। वहीं, इसके बाद कतार में थाईलैंड है और उसने ‘शक्ति’ के बाद के चक्रवात के लिए ‘मोंथा’ नाम दिया है।




