उज्जैन | पंजाब और हरियाणा के किसानो ने मोर्चा खोल रखा है , किसान दिल्ली जाना चाहते है और वह एक बड़ा आन्दोलन खड़ा करना चाहते है , लेकिन पुलिस ने किसानो को दिल्ली को जाने वाले बार्डर पर ही रोक रखा है आन्दोलन को 15 दिन हो चुके है किसान भी पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे है .पुलिस और किसानो के बिच मुठभेड़ भी हो चुकी है कई किसानो की जान जा चुकी है और कुच पुलिस कर्मी भी शहीद हुए है ,हालही में खनौरी बॉर्डर पर आंदोलन के दौरान एक और किसान की मौत हो गई है। धरने के दौरान मंगलवार को पटियाला के रहने वाले करनैल सिंह (50) की तबीयत बिगड़ गई थी। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। 15 दिन से चल रहे आंदोलन के दौरान ये 8 वीं मौत है। इसमें 3 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
किसान अभी शंभू और खनौरी बॉर्डर पर ही डटे हुए हैं। हरियाणा में बॉर्डर पर सड़कें खोली जा रही हैं। आज किसान मजदूर मोर्चा (KMM) और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) दिल्ली कूच पर चर्चा करेंगे। 28 फरवरी को फाइनल फैसला लिया जाएगा।
वहीं किसान मजदूर मोर्चा (KMM) के सरवण पंधेर ने कहा कि केंद्र और पंजाब के कुछ अफसर कह रहे हैं कि हरियाणा पुलिस पर FIR को लेकर केंद्र-किसानों की वार्ता टूटी है। मगर, ऐसा नहीं है। बातचीत कॉन्ट्रैक्ट बेस खेती के प्रस्ताव से टूटी है, हम MSP गारंटी कानून मांग रहे हैं। इसी वजह से वार्ता में अड़ंगा लगा है।
पंधेर ने कहा कि बीते दिन उनके आंदोलन को पूरे देश में समर्थन मिला है। भारत के इतिहास में पहली बार आदिवासियों ने किसानों को समर्थन दिया।
इससे पहले 26 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने पूरे देश में ट्रैक्टर मार्च निकाला। आंदोलन कर रहे संगठनों ने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) के पुतले फूंके।
