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यहां गर्म पत्थर से दागते हैं लड़कियों का चेस्ट, रेप से बचाने के लिए देते हैं दर्द! क्रूर है ये परंपरा!

दुनियाभर के अलग-अलग देशों में कई ऐसी परंपराएं हैं, जिनके बारे में जानकर हैरानी होती है. इनमें से कहीं पर पति की मौत के बाद पत्नी के हाथों की उंगलियों को काट दिया जाता है, तो कहीं पर महिलाओं के होठों में गोला छल्ला डाल दिया जाता है. इन सभी के बारे में जानकर यही कहा जा सकता है कि एक तरफ इंसान ने काफी तरक्की कर ली, लेकिन दूसरी ओर कई अजीबोगरीब प्रथाएं सैकड़ों साल बाद भी जारी हैं. आज हम आपको ऐसी ही चौंकाने वाली परंपरा के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर कमसिन लड़कियों के चेस्ट को गर्म पत्थर से दागा जाता है. सालों से ये क्रूर परंपरा चली आ रही है. मां खुद अपनी बेटियों को इसके लिए तैयार करती है. इन लोगों का तर्क है कि ये सबकुछ लड़कियों को रेप से बचाने के लिए किया जाता है.

हाल ही में इससे जुड़े कुछ पोस्ट भी वायरल हुए. ऐसे में बता दें कि यूनाइटेड नेशन (United Nation) की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 38-39 लाख के करीब ऐसी महिलाएं हैं, जो इस यातना को झेल चुकी हैं. रेप से बचाने के नाम पर लड़कियों को ये क्रूर यातना दी जाती है. इसके लिए गर्म लोहे और पत्थर से उनके चेस्ट को सपाट बना दिया जाता है. यूएन के मुताबिक, नाइजीरिया, साउथ अफ्रीका, कैमरून जैसे पिछड़े देशों के अलावा यूनाइटेड किंगडम में भी कई जगहों पर इस परंपरा को निभाया जाता है. इस प्रथा को निभाने वाले लोगों का मानना है कि लड़कियों के चेस्ट को दागने से वे लड़कों की तरह दिखाई देने लगती हैं, जिससे उनके साथ रेप जैसी घटनाएं नहीं के बराबर होती हैं.

सालों पहले जब यह रिपोर्ट आई थी, तब कई लोगों ने इस परंपरा का विरोध किया था. उस दौरान प्रख्यात लेखिका लैला हुसैन ने इस तरीके को मूर्खतापूर्ण करार देते हुए कहा था कि ऐसा करके लोगों को लगता है उनकी लड़कियां सुरक्षित रहेंगी, लेकिन वे कई अन्य बीमारियों की चपेट में आ सकती हैं. हालांकि, ब्रिटेन, आयरलैंड सहित कई अन्य देशों में ऐसे अत्याचार से लड़कियों को बचाने के लिए कई चैरिटी, वुमन्स एंड गर्ल्स डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन काम कर रही हैं. इस ऑर्गनाइजेशन से जुड़े लोग पुलिस, सोशल एक्टिविस्ट, हेल्थ डिपार्टमेंट और स्कूल के साथ मिलकर लड़कियों और उनके परिवार वालों को इससे होने वाले नुकसान के बारे में बता रहे हैं.

10 से 15 साल की उम्र के लड़कियों संग होता है ऐसा!

यूनाइटेड नेशन की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ज्यादातर मामलों में मां-बेटी मिलकर चुपके से क्रूर काम करवा लेती हैं. उनके बीच ये सीक्रेट हमेशा बना रहता है. छाती को सपाट बनाने के लिए 10 से 15 साल की उम्र की लड़कियों को गर्म लोहे या पत्थर से दागा जाता है, जो उनके जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. इस परंपरा के चक्कर में वो कैंसर, फोड़े, खुजली होने के साथ-साथ अल्सर, स्तन में संक्रमण, गंभीर बुखार की शिकार हो सकती हैं. इतना ही नहीं, उनके शरीर से स्तन पूरी तरह से गायब भी हो सकते हैं, जिससे मां बनने के बाद काफी परेशानी उठानी पड़ेगी.

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