भोपाल /उज्जैन /आलोट || उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में हालही में संपन्न हुए महाकुम्भ का नजारा आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश के उज्जैन में देखने को मिलेगा अप्रेल 2028 के दरमियान धार्मिक नगरी उज्जैन भक्तिमय नजर आएगी क्योकि इस दोरान उज्जैन में सिंहस्थ महाकुम्भ का आयोजन होना है |
इसी सिंहस्थ को लेकर प्रदेश सरकार अभी से तेयारियो में जुट गई है अप्रैल- 2028 में होने वाले सिंहस्थ के लिए किसानों की जमीन के स्थायी अधिग्रहण का प्लान भी सरकार के द्वारा बनाया गया है जिसके तहत सरकार सिंहस्थ क्षेत्र में आने वाली किसानो की जमीन का आधा हिस्सा अधिग्रहण कर उस पर स्थाई निर्माण कार्य किया जाएगा , हालाकि इससे पहले भी किसानो की जमीन का अधिग्रहण किया जाता रहा है लेकिन वह सिंहस्थ के तीन माह पहले अस्थाई होता था |
प्रदेश सरकार के इस निर्णय से हलाकि किसान सहमत नहीं अहि क्योकि जो छोटे किसान है जिन्हें सिंहस्थ क्षेत्र की जमीन पर सिंहस्थ के बाद 11 वर्ष खेती करने का अवसर मिलता था स्थाई अधिग्रहण होने के बाद तो कई किसान केपास जमीन नहीं के बराबर बचने वाली है ऐसे में किसानो ने सरकार के इस फैसले का विरोध कर दिया है |
वही कांग्रेस भी उज्जैन के किसानो के आन्दोलन से सहमत है लेकिन अब किसानो की आवाज खुद भाजपा के ही एक विधायक बन चुके है , उज्जैन आलोट संसदीय क्षेत्र के पूर्व सांसद और वर्तमान में आलोट रतलाम से भाजपा के विधायक चिंतामणि मालवीय भी किसानो के मुद्दे पर खुद अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हो गए है | हालही में विधानसभा में आलोट के बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय ने अपनी ही सरकार को घेरा। कांग्रेस विधायक महेश परमार ने मालवीय के रुख की सराहना की, जबकि सिंहस्थ क्षेत्र के स्थानीय विधायक (उज्जैन उत्तर) अनिल जैन कालूहेड़ा ने चिंतामणि मालवीय के द्वारा किसानो के पक्ष लिए जाने पर आपत्ति ली है ।
उज्जैन उत्तर से शहर के स्थानीय विधायक अनिल जैन ने अप्पति लेते हुए कहा की उज्जैन में पिछले सिंहस्थ में आंधी तूफ़ान के कारण कीचड़ हो गया था जिसके कारन कोई वाहन नहीं जा पा रहे थे लेकिन हमारी सरकार ने इस बार पंडालो तक पहुँचने के लिए पक्की सड़क बनाने का निर्णय लिया है जो स्वागत योग्य है |
सबसे पहले जानिए आलोट विधायक ने क्या कहा? बजट पर बोलते हुए आलोट से बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय ने कहा- मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने 2 हजार करोड़ रुपए उज्जैन सिंहस्थ के लिए रखे हैं, उज्जैन उन पर अभिमान करता है।
उज्जैन उनको अपना नेता मानता है, उज्जैन को गर्व है कि मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री उज्जैन से है। लेकिन, आज उज्जैन का किसान बहुत डरा और परेशान है। क्योंकि, सिंहस्थ के नाम पर उसकी जमीन पहले केवल 3-6 महीनों के लिए अधिग्रहित की जाती थी लेकिन आज उन्हें स्थायी अधिग्रहण का नोटिस दिया गया है।
पता नहीं किस अधिकारी ने यह विचार रखा है कि, स्पिरिचुअल सिटी (आध्यात्मिक नगरी) बनाएंगे। मैं बताना चाहता हूं कि स्प्रिचुअलिटी किसी सिटी में नहीं रहती है। वह तो त्याग करने वाले लोगों से होती है। हम क्रांक्रीट के भवन बनाकर स्पिरिचुअल सिटी नहीं बना सकते।
