उज्जैन || धार्मिक नगरी उज्जैन में आज शानिचारी अमावस्या पर भक्तो की भीड़ देखने को मिल रही है मोस्ख दायिनी माँ शिप्रा में आस्था की डुबकी लगाने के लिए दूर दराज से श्रद्धालु सुबह से ही उज्जैन के त्रिवेणी घाट और रामघाट पर पहुँच रहे है , आज के दिन त्रिवेणी शनि मंदिर के तट पर स्नान करने और बाद में शनि देव के दर्शन करने का महत्व माना गया है , प्रशासन ने अमावस्या पर आने वाले श्रधालुओ की भीड़ को देखते हुए मंदिर और घाट पर चाक चोबंद इंतजाम किये है |
दरअसल हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है और यह तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है. इस दिन सुबह पवित्र नदियों में स्नान करके पितरों के नाम का तर्पण और पिंडदान करने से पितर प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष से मुक्ति भी मिलती है. चूँकि उज्जैन स्थित शिप्रा नदी भी देश की प्रमुख नदियों में शामिल है ऐसे में यहाँ स्नान करने और तर्पण पिंडदान आदि करने का महत्व भी बढ़ जाता है दरअसल जब अमावस्या तिथि शनिवार के दिन पड़ती है तब उसे शनि अमावस्या या शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं. साथ ही आज साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण लगने वाला है और शनि भी मीन राशि में गोचर करने वाले हैं. शनि अमावस्या के दिन शनिदेव की पूजा अर्चना करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और शनि दोष के अशुभ प्रभाव में कमी भी आती है.
धार्मिक मान्यता है कि शनिश्चरी अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से कई गुना ज्यादा पुण्य मिलता है। शनि अमावस्या के दिन श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य के कार्यों से पितरों के आत्मा को शांति मिलती है। इस दिन धर्म-कर्म के कार्यों से पितरों के साथ शनिदेव भी प्रसन्न होते हैं।
शनि जयंती मनाने से शनि के बुरे प्रभाव कम होते हैं और समृद्धि, अनुशासन और आध्यात्मिक विकास का आशीर्वाद मिलता है । भक्त भगवान शनि का सम्मान करने और उनकी दिव्य सुरक्षा और मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए अनुष्ठान, प्रार्थना और धर्मार्थ कार्य करते हैं।

