नई दिल्ली || भारतीय रेल ने एक और मील का पत्थर छू लिया है। नवंबर तक अपने नेटवर्क का 99.2 % विद्युतीकरण कर भारतीय रेल दुनिया की सबसे व्यापक विद्युतीकृत रेल प्रणालियों में से एक बन गई है। यह आधुनिक और टिकाऊ भविष्य की दिशा में एक बड़ी छलांग है। कभी बड़े पैमाने पर डीजल द्वारा संचालित भारतीय रेल अब मिशन 100% विद्युतीकरण की ओर बढ़ने लगी है। 2004 से 2014 के बीच इस विद्युतीकरण की गति 1.42 किलोमीटर/दिन रही जो 2019 से 2025 के बीच बढ़कर 15 किलोमीटर/दिन से अधिक हो गई है, जो भारतीय रेल के आधुनिकीकरण में बड़ी तेजी को दर्शाता है।
मिशन शत प्रतिशत विद्युतीकरण के तहत, नेटवर्क में तारों के फैलने के साथ, रेल प्रणाली तेज और अधिक कुशल होती जा रही है। यह परिवर्तन प्रदूषण को कम करने के लिए भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नवंबर 2025 तक भारतीय रेलवे ने अपनी सौर ऊर्जा क्षमता को 898 मेगावाट तक बढ़ा दिया है, जो 2014 में 3.68 मेगावाट था।
यह नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने में परिवर्तनकारी वृद्धि को दर्शाता है। साथ ही इससे राष्ट्र के लिए स्वच्छ वातावरण और स्मार्ट परिवहन सुनिश्चित होता है और यह पटरियों पर हो रही मूक क्रांति का संकेत देता है। इसके अलावा सौर ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को भी स्टेशनों और परिचालनों में एकीकृत किया जा रहा है।
बता दें कि रेलवे के विद्युतीकरण की यात्रा 1925 में शुरू हुई थी, जिसकी प्रगति की एक सदी पूरी हो रही है। तब 1500 वोल्ट डीसी सिस्टम से संचालित देश की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन बॉम्बे विक्टोरिया टर्मिनस और कुर्ला हार्बर के बीच चली। यह एक छोटा रेल मार्ग था, लेकिन एक ऐतिहासिक छलांग थी।
