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खरगोन ( जनसंवाद एक्सप्रेस ब्यूरो रिपोर्ट) |देश भर में महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है क्योकि सनातन धर्म के लिए महाशिवरात्रि के पर्व को बड़ा पर्व माना गया है,इस दिन भक्त भगवान शंकर को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा-अर्चना करते हैं,यही वजह है की महाशिवरात्रि के अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों का तांता देखने को मिलता है। और आज हम आपको इस पर्व के अवसर पर बताने जा रहे है एक ऐसे चमत्कारी मंदिर के बारे में जंहा दर्शन मात्र से भक्तो की मनोकामनाए पूरी होती है , निमांड अंचल में दो हजार वर्ष पूर्व के प्राचीन शालीवाहन मंदिर स्थित है जहां दर्शन मात्र से भक्तों को सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है।
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यह मंदिर मध्यप्रदेश के इंदौर संभाग में आने वाले खरगोन जिले की कसरावद तहसील मुख्यालय से 4 किलोमीटर की दूरी पर नर्मदा नदी के दक्षिण तट पर स्थित है इस देव स्थल को शालीवाहन शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है , यह प्राचीन शिवलिंग है। मान्यता है कि शालिवाहन शिव मंदिर सातवाहन वंश में शालीवाहन राजा हुए थे जिनका राज्य की सीमा पर यह स्मारक बनवाया था। संवत् 1944 अनुसार शालीवाहन मंदिर करीब 2000 वर्ष पुराना होने के साथ ही अतिप्राचीन स्थल है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन होते है और अंतिम दिन महाप्रसादी का वितरण किया जाता है।
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वही अतिप्राचीन इस मंदिर का शालीवाहन राजा के द्वारा निर्माण कराया गया था,जो अब ना सिर्फ खरगोन जिले बल्कि आसपास के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन गया है।शालीवाहन महादेव मंदिर में ना सिर्फ श्रावण माह और महाशिवरात्रि बल्कि सालभर भक्तों का तांता देखने को मिलता है। धार्मिक मान्यता है की जो भी शिवभक्त शालीवाहन भगवान की सच्चे मन से प्रार्थना करता है उसका दामन खुशियों से भर जाता है।