नई दिल्ली | देश भर में भाजपा शासित राज्यों में बुलडोजर परम्परा चालु हो गई है इसका खास असर उत्तरप्रदेश मध्यप्रदेश राजस्थान जैसे राज्यों में देखने को मिला और यह सभी राज्यों में भाजपा की सरकार है |
हालही में मध्यप्रदेश के छतरपुर में राज्यसरकार ने पुलिस और भीड़ के बिच हुए विवाद मामले में कांग्रेस के पूर्व पदाधिकारी का बेश कीमती मकान जमीदोज कर दिया वही घर में खडी लक्झरी गाडियों पर भी बुलडोजर चला दिया गया |’
उक्त मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों की सरकारोंसे जवाब माँगा है वही केंद्र सरकार को भी आड़े हाथ लिया है |
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद बुलडोजर परम्परा पर कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी का भी बयान सामने आया है राहुल गाँधी ने कोर्ट के फैसले की सराहना की है |
आपको बता दे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुलडोजर एक्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी की सराहना की। उन्होंने कहा कि मानवता और न्याय को बुलडोजर के नीचे कुचलने वाली भाजपा का संविधान विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि इस मामले में कोर्ट निर्देश जारी कर भाजपा सरकारों के लोकतंत्र विरोधी अभियान से जनता की रक्षा करेगा। देश बाबा साहब के संविधान से चलेगा, सत्ता के चाबुक से नहीं।
दरअसल, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में देशभर में आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई सिर्फ आरोपी है तो प्रॉपर्टी गिराने की कार्रवाई कैसे की जा सकती है? जस्टिस विश्वनाथन और जस्टिस बीआर गवई की बेंच ने कहा, “अगर कोई दोषी भी हो, तब भी ऐसी कार्रवाई नहीं की जा सकती है।”
बुलडोजर एक्शन पर आखिर क्या है सुप्रीम कोर्ट के कमेंट, और क्या है केंद्र का जवाब
हम यहां अवैध अतिक्रमण के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। इस मामले से जुड़ी पार्टियां सुझाव दें। हम पूरे देश के लिए गाइडलाइन जारी कर सकते हैं- सुप्रीम कोर्ट
किसी का बेटा आरोपी हो सकता है, लेकिन इस आधार पर पिता का घर गिरा देना! यह कार्रवाई का सही तरीका नहीं है- सुप्रीम कोर्ट
किसी भी आरोपी की प्रॉपर्टी इसलिए नहीं गिराई गई क्योंकि उसने अपराध किया। आरोपी के अवैध कब्जों पर म्युनिसिपल एक्ट के तहत एक्शन लिया है- केंद्र सरकार
याचिका में आरोप-पीड़ितों को बचने का मौका नहीं दिया
जमीयत के वकील फारूक रशीद का कहना है कि अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न करने और उन्हें डराने के लिए राज्य सरकारें घरों और संपत्तियों पर बुलडोजर एक्शन को बढ़ावा दे रही हैं।
याचिका में यह भी आरोप है कि सरकारों ने पीड़ितों को अपना बचाव करने का मौका ही नहीं दिया। बल्कि कानूनी प्रक्रिया का इंतजार किए बिना पीड़ितों को तुरंत सजा के तौर पर घरों पर बुलडोजर चला दिया।