बैतूल- : बैतूल जिले की पारंपरिक शिल्पकला भरेवा कला को आखिरकार वह राष्ट्रीय पहचान मिल गई, जिसका इंतजार वर्षों से था। बीते दिनों क्राफ्ट विलेज टिगरिया की भरेवा कला को जीआई टैग मिला था और आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु कला को जीवांत रखें भरेवा शिल्प के कलाकार बलदेव वाघमारे को वर्ष 2024 के लिए प्रतिष्ठित हस्तशिल्प पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित करेंगी।
जीआई टैग मिलने पर बलदेव वाघमारे ने बताया था कि जीआई टैग मिलने से अब भरेवा कला को राष्ट्रीय बाजार के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी एक अलग पहचान मिलेगी। इससे बैतूल के कारीगरों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही नकली उत्पादों पर रोक लगेगी और असली भरेवा कला की ब्रांड वैल्यू बढ़ेगी। इसके लिए शिल्पकार वाघमारे ने मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव का आभार व्यक्त किया है। सचिव सनराइज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी राजकुमार सिरोरिया ने बताया कि राज्य सरकार ने एक वर्ष पूर्व ही नाबार्ड भोपाल के सहयोग से इन सभी 5 प्राचीन शिल्प कलाओं के जीआई टैग के लिए दावा किया था। अब मध्यप्रदेश की 5 प्राचीन शिल्प कलाओं को जीआई टैग मिला है, अब यह भारत की बौद्धिक संपदा अधिकार सूची में शामिल हो गई हैं।
इनमें खजुराहो स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर फर्नीचर, बैतूल भरेवा मेटल क्राफ्ट, ग्वालियर पत्थर शिल्प और ग्वालियर पेपर मैशे शामिल हैं। बैतूल के विलेज क्राफ्ट टिगरिया में भरेवा कला पीढ़ियों से संजोई गई विशिष्ट कला है। मिट्टी, लकड़ी और प्राकृतिक रंगों के मिश्रण से बनने वाले सजावटी व उपयोगी सामान अपनी सुंदर नक्काशी और पारंपरिक डिजाइन के लिए खास पहचान रखते हैं। यही विशिष्टता इस कला को बेहतर और अनोखा बनाती है। बैतूल की यह गौरवशाली विरासत अब देश के मानचित्र पर अपने नाम के साथ चमकेगी और कारीगरों की कला को नई उड़ान देगी।
विदित है कि लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जन्म जयंती के अवसर पर भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित भव्य महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैतूल जिले की भरेवा धातु शिल्प से निर्मित “पुष्पक“ कलाकृति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेंट की थी, जो कि प्रदेश की जनजातीय कला परंपरा का जीवंत उदाहरण है।


