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फिर शिप्रा बनी नाला..सीवरेज का पानी शिप्रा में प्रवाहमान,सज्जन वर्मा ने कहा हमारी सरकार थी तो कलेक्टर और कमिश्नर पर भी की थी कार्रवाही ,महामंडलेश्वर बोले शासन की शिप्रा को लेकर मंशा ठीक नही

उज्जैन। मध्यप्रदेश में उज्जैन की पहचान देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ साथ मोक्ष दायिनी माँ शिप्रा के कारण भी है। देश भर के श्रद्धालुओं का यह आगमन होता है बारह साल में उज्जैन में कुंभ के मेले का भी आयोजन होता है। लेकिन देश के सो  स्मार्ट सिटी में शामिल उज्जैन शहर में शिप्रा नदी को यंहा  के गंदे नालों से मुक्ति नही मिल पा रही है।

सीवरेज के पानी से काली पड़ी शिप्रा

सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान भी शिप्रा के दूषित होने का मुद्दा अखाड़ा परिषद के संतों ने उठाया था और सरकार को काफी विरोध का सामना करना पड़ा था।

संतो को मनाने के साथ सरकार ने अस्थाई विकल्प पर करोड़ो रूपये का फंड खर्चा कर शिप्रा को शुद्ध करने के लिए पम्पिंग स्टेशन  स्थापित किये थे  और सिंहस्थ सम्पन्न करवाया।लेकिन शिप्रा को शुध्द करने के लिए स्थाई विकल्प आज तक नही निकाला जा सका।

कांग्रेस की 18 महीने की सरकार के दौरान त्रिवेणी स्थित शिप्रा नदी के दूषित पानी मे शनि चारी अमावस्या के स्नान करवाने के मामले में तत्कालीन सरकार ने तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह और संभागयुक्त एम बी ओझा को व्यवस्थाओं में लापरवाही मानते हुए तत्काल प्रभाव से हटा दिया था ।

तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह और तत्कालीन संभागायुक्त एम् बी ओझा

14 दिन में तीसरी बार शिप्रा नदी में दूषित पानी मिलने की घटना सामने आई है,हरसिध्दि की पाल पर अंडर ग्राउंड पाईप डालने के लिए ठेकेदार ने खुदाई की थी ओर सागर के पानी के लिए दाल बनाई थी। रविवार सुबह 5 फुट गया और चेहरे का गंदा पानी शिप्रा में मिल गया 3 घंटे तक दूषित पानी शिप्रा में मिलता है बाद में ठेकेदार द्वारा सीमेंट की बोरियों की पाल बनाकर पानी को रोकने का प्रयास किया गया लेकिन कब तक हजारों गैलन पानी शिप्रा में मिल चुका था जिससे शिप्रा सीवरेज के पानी में तब्दील हो गई

उज्जैन में एक बार शिप्रा नदी में दूषित पानी मिलने से शिप्रा नाले में तब्दील हो गई और जिम्मेदारों ने पल्ला झाड़ते हुए स्मार्ट सिटी के कार्यपालन यंत्री संविदा मनीष जैन को तत्काल प्रभाव से हटाने की कार्रवाही की गई।जबकि गंभीर लापरवाही में बड़े जिम्मेदारों को बचाने का काम किया गया।

उधर धर्म की राजनीति के नाम पर प्रदेश में एक बार फिर अपनी जमीन तलाश रही शिवराज सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस को चुनावी साल में एक मुद्दा मिल गया है।

कांग्रेस ने मामले पर शिवराज सरकार को घेरने का काम किया है पूर्व केबिनेट मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने     कहा कि प्रदेश में नकली धर्मावलंबियों की सरकार है जो सिर्फ ढोंग कर रही है। हमारी सरकार थी तो हमने स्नान के दौरान दूषित पानी की जानकारी लगने पर कलेक्टर ओर कमिश्नर को हटा दिया था। शिप्रा के दूषित होने के मामले में कलेक्टर पर कार्रवाही होना चाहिए छोटे कर्मचारी को मोहरा बनाकर पल्ला ना झाड़ा जाए।

 

वही कांग्रेस के स्थानीय नेता मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य एडवोकेट विवेक गुप्ता ने कहा कि शिप्रा नदी में. नाले का गंदा पानी. मिल रहा है.हिन्दू आस्था पर आघात हैं.जिम्मेदार स्मार्ट सिटी सीओ को हटाया जाए।

 

शिप्रा दूषित मामले में संतो का भी आक्रोश देखने को मिल रहा है महामंडलेश्वर शेलेशनन्द गिरी महाराज ने कहा की शिप्रा को लेकर शासन और प्रशासन की मंशा आज तक साफ नही है, शिप्रा पर काम राजनीति से अलग हट कर करना चाहिए, दूषित मामले में छोटे कर्मचारी पर कार्रवाही दिखावा मात्र, छोटा कर्मचारी बड़े अधिकारी की कठपुतली बनकर काम करता है, दोषी तो बड़े अधिकारी होते है।

 

स्वस्तिक पीठाधीश्वर क्रांतिकारी संत डॉक्टर अवधेश पूरी जी ने कहा कि ये बड़ी लापरवाही है कांग्रेस की सरकार ने शनीचरी अमावस्या के स्नान के दौरान दूषित पानी मामले में कलेक्टर को हटा दिया था ये तो बड़ी घटना है, शिप्रा का अपमान नही सहा जाएगा,सिंहस्थ नजदीक है स्थायी रूप से शिप्रा शुध्द हो

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