भोपाल / उज्जैन | राजधानी भोपाल में आवारा कुत्तों से बच्चों की जान पर बन आई है, लेकिन नगर निगम और पेट लवर्स को आपस में झगड़ने से ही फुर्सत नहीं मिल रही है। आवारा कुत्तों के आतंक पर जब निगम की लापरवाही सामने आई तो जिम्मेदार जागे और डॉग्स को पकड़ने का अभियान छेड़ दिया और शहर के गली मोहल्लो में घुमने वाले आवारा कुत्तो को पकड़ने का काम शुरू कर दिया है , लेकिन सब भी तब हुआ जब कुत्तो के आतंक से आम लोगो को नुक्सान पहुचने लगा , हालाकि इस कार्रवाही पर कई जगह पेट लवर्स का विरोध भी देखने को मिला है लेकिन निगम कर्मियों से नोंक-झोंक करने पर अब तक 7 पेट लवर्स पर केस दर्ज हो चुके हैं। महापौर मालती राय ने कहा- कर्मचारी 20 किलो का भारी पिंजरा लेकर दौड़ते हैं और मुश्किल से पकड़ते हैं, लेकिन वे (पेट लवर्स) छुड़ा ले जाते हैं। ऐसे पेट लवर्स पर आगे भी केस दर्ज कराएंगे।
इधर, निगम और पेट लवर्स के बीच चल रहे वार के दौरान ही कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मंगलवार को मिसरोद इलाके में 2 बच्चों को कुत्तों ने काट लिया। वहीं, पूरे दिन कुल 41 लोग भी शिकार बने। दिन भर डॉग बाइट की घटनाएं होने के बाद पीड़ित जेपी हॉस्पिटल पहुंचे और इलाज कराया।
उज्जैन में नगर निगम की नहीं खुल रही नींद , हादसे कर किया जा रहा इन्तजार
इधर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में नगर निगम की किसी भी काम को लेकर सक्रियता नजर नहीं आती है शहर में अतिक्रमण हो या फिर आवारा मवेशियों को खुले में घुमने की छुट , आवारा कुत्तो को आतंक उज्जैन में भी कोई कम नहीं है बावजूद निगम की कुत्ता पकड़ने वाली टीम के पते तक नहीं है यह तक की शहर के लोगो को पता नहीं है की आवारा मवेशी को पकडवाने के लिए किससे संपर्क करना पड़ेगा , यही हाल शहर में सडको पर बैठे आवारा मवेशियों को लेकर भी है निगम दिखावा मात्र करवाई करती है , वही निगम की ही टीम मवेशी मालिको को साथ लेकर चलती है | यही कारण है की मुख्यमंत्री का शहर अभी भी मवेशियों से मुक्त नहीं हो पा रहा जो हादसे का कारण बन रहा है |
