उज्जैन | खुद को भगवान कहने वाले साधु – संतों के खिलाफ अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने नाराजगी जाहिर की है। उज्जैन पहुंचे रविंद्र पुरी महाराज ने कहा, ‘आजकल ऐसा ट्रेंड चला है कि हर कोई अपने आप को उपासक-पुजारी नहीं, भगवान कह रहा है। खुद को ब्रह्मा, विष्णु, महेश और राम, विष्णु कह रहे हैं, ऐसे संतों पर कार्रवाई होना अति आवश्यक है। प्रयागराज के कुंभ में ऐसे व्यक्तियों को भूमि नहीं दी जाएगी।’
प्रयागराज में कुम्भ 2025 में होगा। उज्जैन में 4 साल बाद कुम्भ होना है। ऐसे में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष यहां व्यवस्थाएं देखने आए। उन्होंने कहा, ‘हमारी सनातन संस्कृति के विरोध में जो जाएगा, उस पर कार्रवाई होगी। मंच से अल्लाह हू अकबर कहना, नमाज पढ़ना उचित नहीं है। मंच पर पति-पत्नी बैठकर शादी करें, ये चीजें अच्छी नहीं हैं। ऐसे संतों को चिह्नित किया जाएगा, जो सनातन के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं।’
अखाडा परिषद् के अध्यक्ष का कड़ा रुख
6 महामंडलेश्वर को निष्कासाति करने के संबंध में रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि फिलहाल दो महीने पहले सिर्फ उज्जैन में महिला महामंडलेश्वर को निष्कासित किया गया है, अन्य किसी को नहीं। 112 संतों को नोटिस देने के संबंध में उन्होंने कहा कि सभी अखाड़ों की अपनी व्यवस्था है। अखाड़े से संबंधित किसी संत को गलती करने पर उनके अखाड़े ने नोटिस जारी किया होगा और वही कार्रवाई भी करेंगे।
जूना अखाड़े ने 54 संत, श्री निरंजनी अखाड़े ने 24 संतों और निर्मोही अनी अखाड़े ने 34 संतों को नोटिस थमाया है। संतों को आदेशित किया है कि 30 सितंबर तक संतोषजनक जवाब नहीं देने पर कुंभ मेले में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।
