नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट की बुधवार को हुई बैठक में मोदी सरकार ने देश में जाति जनगणना करवाने का फैसला लिया है. विपक्षी दलों की तरफ से लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी. कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार सरकार पर इसे लेकर हमलावर थे. बताते चलें कि भारत में जाति जनगणना की मांग काफी पुरानी रही है. बिहार चुनाव से पहले इसे मास्टर स्ट्रोक के तौर पर देखा जा रहा है. बिहार में महागठबंधन के सरकार के दौरान नीतीश कुमार के कैबिनेट जातिगत सर्वे करवाया था. जिसके बाद से देश भर में इसे करवाने की मांग हो रही थी.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सामाजिक ताने-बाने को ध्यान में रखकर संविधान में स्पष्ट व्यवस्था के मद्देनजर ये फैसला लिया गया है. केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि 1947 से जाति जनगणना नहीं की गई. मनमोहन सिंह ने जाति जनगणना की बात कही थी. कांग्रेस ने जाति जनगणना की बात को केवल अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया है.
देश में आजादी के बाद पहली बार जाति जनगणना कराई जाएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को जाति जनगणना को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इसे मूल जनगणना के साथ ही कराया जाएगा। देश में इसी साल के आखिर में बिहार विधानसभा के चुनाव होने हैं।
कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल जाति जनगणना कराने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि जाति जनगणना की शुरुआत सितंबर में की जा सकती है।
हालांकि जनगणना की प्रोसेस पूरी होने में एक साल लगेगा। ऐसे में जनगणना के अंतिम आंकड़े 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में मिल सकेंगे। देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। इसे हर 10 साल में किया जाता है।
इस हिसाब से 2021 में अगली जनगणना होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था।
