उज्जैन ब्यूरो विक्रमोत्सव इन दिनों उज्जैन में चल रहा है और मंगलवार को कुमार विश्वास की राम कथा अपने अपने राम के तीन दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत हुई लेकिन शुरुआत के दिन ही कुमार विश्वास ने सरकार और भाजपा के नेताओ का विश्वास तोड़ दिया ये विश्वाश उन्होंने अपनी कथा के दौरान एक विवादित वक्तव्य देकर तोड़ा जिसमें उन्होंने कहा कि देश में “वामपंथी कुपढ़” हैं और “आर एस एस वाले अनपढ़” हैं। विश्वास के इस वक्तव्य के दोरान मंच के सामने कथा सुनने वालो में भाजपा नेताओ सहित विधायक मंत्री भी मोजूद थे |
तीन दिन की कथा करने आए विश्वास ने पहले ही दिन तोड़ा विश्वास, वामपंथी कुपढ़ हैं,और आरएसएस वाले अनपढ़ -कुमार विश्वास – https://t.co/VnrldV0bKd @DrKumarVishwas @DrMohanYadav51 @ChouhanShivraj @OfficeOfKNath @digvijaya_28 @ArvindKejriwal @sanjaynirupam
— हिंदी साप्ताहिक जनसंवाद एक्सप्रेस (@JansamvadE) February 22, 2023
उज्जैन में विक्रमोत्सव में अपनी कथा के दोरान कुमार विश्वास ने कहा कि एक दिन मैं अपने स्टूडियो में बैठा था कुछ रिकॉर्ड कर रहा था तभी मेरे यहां काम करने वाला है एक युवक जो आर एस एस के लिए काम करता हैआया और बोला कि भैया कल बजट आने वाला है तो बजट कैसा होना चाहिए, तो मैंने कहा कि तुमने तो राम राज्य की सरकार बनाई है तो रामराज्य जैसा ही बजट होना, तो उस बच्चे ने कहा कि राम राज्य में कहां बजट होता था तो मैंने कहा कि तुम्हारी यही समस्या है कि वामपंथी लोग कुपढ़ हैं और तुम अनपढ़ हो ,हमारे इस देश मैं दो ही लोगों का झगड़ा चल रहा है एक वामपंथी जो पढ़े तो हैं लेकिन उन्होंने गलत पढ़ा है और दूसरे तुम जिन्होंने कुछ पढ़ा ही नहीं है और उसके बाद ये कहते हैं कि हमारे ग्रंथों में यह लिखा है वह लिखा है लेकिन ग्रंथ कैसे होते हैं? इन्होंने देखे नहीं हैं पहले उसको पढ़ तो लो उसमें लिखा क्या है।

बहरहाल इस कार्यक्रम में उज्जैन दक्षिण के विधायक एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ मोहन यादव ,उज्जैन उत्तर के विधायक पारस जैन और सांसद अनिल फिरोजिया सहित बीजेपी के कई नेता मौजूद थे ,वक्तव्य पूरा होने के बाद वहां बैठे हजारों श्रोताओं ने तालियां बजाई। लेकिन ऐसे में सवाल यह उठता है कि कुमार विश्वास जोकि पूर्व आम आदमी पार्टी के नेता रहे हैं और एक कवि भी हैं और उसके बाद अब राम कथा वाचक भी हैं, इस प्रकार राम कथा के दौरान भारत के एक हिंदूवादी संगठन और वामपंथी संगठन के बारे में इस तरह के अपशब्द का इस्तेमाल किया जाना एक राम कथा वाचक की मानसिकता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है ,अब इस वक्तव्य का मौजूदा राजनीतिक परिपेक्ष में और संगठनात्मक परिपेक्ष में क्या प्रभाव पड़ेगा यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
