- पिपलौदा के केसर विलास पैलेस में महाराजा ने किया गादी पूजन
- जीवंत हुई रियासतकालीन परंपरा
- शमी पूजन के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ गादी पूजन
- राज नगाड़ची और राज बारोट के ढोल-नगाड़ों की जुगलबंदी बनी आकर्षण
पिपलौदा। दशहरे के पावन अवसर पर नगर के ऐतिहासिक केसर विलास पैलेस में रियासतकालीन राजपरंपरा के अनुसार गादी पूजन समारोह आयोजित किया गया। राजसी परंपराओं और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न इस आयोजन में वर्षों पुरानी विरासत की झलक देखने को मिली। राजपरिवार ने परंपराओं का निर्वहन करते हुए दशहरा पर्व मनाया।
कार्यक्रम के तहत दोपहर 3 बजे शमी पूजन किया गया। इसके बाद शाम 7 बजे केसर विलास पैलेस में विधि-विधान के साथ गादी पूजन संपन्न हुआ। राज पुरोहित ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन की प्रक्रिया पूरी कराई।
राजपरिवार के सदस्य रहे मौजूद
गादी पूजन के अवसर पर रियासत के वर्तमान महाराजा मयूरध्वजसिंह, राजमाता रानी सिंह, राजकुमारी संघमित्रा और राजकुमारी चित्रांगदा सहित राजपरिवार के सदस्य उपस्थित रहे। समारोह में नगर एवं क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने भी भाग लिया।
ढोल-नगाड़ों की जुगलबंदी ने बांधा समां
समारोह का विशेष आकर्षण राज नगाड़ची और राज बारोट के ढोल-नगाड़ों की जुगलबंदी रही। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज ने केसर विलास पैलेस में रियासतकालीन परंपरा की यादें ताजा कर दीं। इस दौरान राजसी रीति-रिवाजों के साथ गादी पूजन संपन्न हुआ।
पूजन के पश्चात महाराजा मयूरध्वजसिंह ने उपस्थित लोगों को दशहरा पर्व की शुभकामनाएं दीं। ऐतिहासिक केसर विलास पैलेस में आयोजित इस समारोह ने नगर की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को एक बार फिर रेखांकित किया।

