नई दिल्ली || जी-4 में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं। ये सभी देश संयुक्त रूप से परिषद के सुधारों की वकालत करते रहे हैं और स्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे का समर्थन करते हैं।
जी-4 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पुनर्गठन के लिए शीघ्र कार्रवाई का एक मॉडल प्रस्तुत किया है। समूह ने चेतावनी दी है कि संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था में सुधारों में देरी से और अधिक मानवीय पीड़ा और कष्ट होंगे। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कल अमरीका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधारों के लिए अंतर-सरकारी वार्ता में जी-4 की ओर से यह बात कही। जी-4 में भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं। ये सभी देश संयुक्त रूप से परिषद के सुधारों की वकालत करते रहे हैं और स्थायी सदस्यता के लिए एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। श्री हरीश ने कहा कि विश्व में चल रहे संघर्षों में प्रतिदिन अनगिनत निर्दोष लोगों की जान जा रही है, ऐसे में वैश्विक समुदाय को सामूहिक रूप से हर पल का सदुपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघर्षों से निपटने में संयुक्त राष्ट्र की अक्षमता के कारण उसकी विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
श्री हरीश ने सभी श्रेणियों और भौगोलिक क्षेत्रों को शामिल करते हुए सुधारों के लिए जी4 के ठोस मॉडल को सामने रखा। परिषद का आकार वर्तमान 15 से बढ़ाकर 25 या 26 किया जाना चाहिए, जिनमें से छह नए स्थायी पद होने चाहिए। उन्होंने कहा कि इन छह नए स्थायी पदों में से दो अफ्रीकी क्षेत्र को, दो एशिया प्रशांत क्षेत्र को और एक-एक लातिन अमरीका और पश्चिमी यूरोप को दिए जाने चाहिए। जी4 ने इस बात पर जोर दिया कि वह धर्म के आधार पर नए पद शुरू करने के खिलाफ है।
