- चार दिवसीय भगवान परशुराम प्रकट उत्सव एवं जगतगुरु शंकराचार्य जयंती का समापन
उज्जैन। ढाई हजार वर्ष पूर्व आद्य जगतगुरु शंकराचार्य महाराज ने जिस सनातन धर्म की रक्षा के लिए संपूर्ण भारत का भ्रमण कर चारों दिशाओं में चार मठों की स्थापना की थी उसी शंकराचार्य परंपरा को देश और दुनिया में महामंडलेश्वर और संत समाज ही सनातन धर्म से आज जोड़े हुए हैं। इसीलिए आज हम शंकराचार्य जयंती पर महामंडलेश्वरों व संतों का सम्मान कर सनातन परंपरा को गौरवान्वित कर रहे हैं।

उक्त उद्गार अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुरेंद्र चतुर्वेदी ने चार धाम मंदिर उज्जैन में शंकराचार्य जयंती पर आयोजित महामंडलेश्वर एवं संत सम्मान समारोह में प्रकट किये। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज द्वारा इस अवसर पर चार दिवसीय भगवान परशुराम प्रकट उत्सव एवं जगतगुरु शंकराचार्य जयंती का समापन अवसर पर महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद जी सरस्वती की उपस्थिति में आयोजित समारोह में महामंडलेश्वर शैलेषानंद गिरि महाराज जूना अखाड़ा, ज्ञान दास जी महाराज महामंडलेश्वर दादूराम आश्रम, तथा संत समिति उज्जैन अध्यक्ष विशाल दास जी महाराज, इस्कॉन के संत जगत जीवनदास जी महाराज, जितेंद्र दास महाराज आदि का सम्मान अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज की ओर से एवं समस्त सनातन धर्मावलम्बियों की ओर से संत सत्कार समिति की ओर से किया गया।
इस अवसर पर भारतीय ब्राह्मण समाज संरक्षक सुरेश मोढ, जियालाल शर्मा, महामंत्री तरुण उपाध्याय, पार्षद एवं परशुराम चल समारोह के संयोजक पंडित रामेश्वर दुबे, नगर निगम पूर्व अपर कमिश्नर आदित्य नागर, महाकालेश्वर मंदिर समिति सदस्य राजेंद्र शर्मा गुरु, पंडित विनय ओझा, संत सत्कार समिति के रामेश्वर जोशी, रविंद्र भारद्वाज, निपुण पालीवाल, राजेश व्यास, डॉ आरके नागर, पूर्व महाकाल प्रशासक आनंदी लाल जोशी, गोकुल शर्मा, विशाल शर्मा, सुषमा सेठिया, मनोज विश्वकर्मा, प्रहलाद गुप्ता आदि ने प्रमुख रूप से उपस्थित होकर संतों का सम्मान अभिनंदन किया।

