सिंहस्थ 2016 की आगजनी से सबक नहीं
खस्ताहाल बेड़े के भरोसे करोड़ों की सुरक्षा
IAS संकेत भोंडवे की कार्यशैली पर भी उठे सवाल
उज्जैन, 29 मई। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का दावा कर रहे उज्जैन नगर निगम की आपातकालीन व्यवस्थाओं की पोल शुक्रवार को आगर रोड पर खुल गई। आग बुझाने और आपदा में जान बचाने वाली नगर निगम की दमकल गाड़ी खुद बीच सड़क पर ‘दम तोड़’ गई। इससे घंटों लंबा जाम लगा और राहगीरों को परेशानी झेलनी पड़ी।
दूसरी दमकल से खींचकर हटाई गई
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आगर रोड पर अचानक दमकल खराब होकर बंद हो गई। तमाशा तब बना जब इस लाचार गाड़ी को हटाने के लिए नगर निगम को दूसरी दमकल बुलानी पड़ी। दूसरी गाड़ी ने रस्सी से खींचकर इसे रास्ते से हटाया। बीच सड़क खड़ी फायर ब्रिगेड को देखकर लोग चुटकियां लेते नजर आए।

स्थानीय लोगों ने कहा, *“जो गाड़ियां खुद बैसाखियों के भरोसे हैं, वे सिंहस्थ जैसे वैश्विक आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा कैसे करेंगी?”*
सिंहस्थ 2016 से सबक नहीं
प्रशासन की यह लापरवाही इसलिए डराने वाली है क्योंकि उज्जैन सिंहस्थ 2016 की आगजनी की घटनाएं भूली नहीं हैं। पिछले सिंहस्थ में साधु-संतों के पंडालों और शिविरों में शॉर्ट सर्किट से आग भड़क गई थी। तब एनडीआरएफ और दमकल कर्मियों की मुस्तैदी से बड़ा हादसा टला था।
सवाल है कि उन हादसों से सबक लेने के बजाय प्रशासन आज भी कबाड़ हो चुके बेड़े के भरोसे क्यों है। अगर 2028 में किसी अखाड़े या पंडाल में आग लगी और दमकल रास्ते में ही हांफ गई, तो जिम्मेदार कौन होगा?
मेंटेनेंस बजट कहां जा रहा?
करोड़ों के बजट और संधारण के दावों के बीच दमकल गाड़ियों की यह बदहाली नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। सिंहस्थ 2028 में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु आएंगे। मुख्य मार्ग पर ही दमकलें इस तरह जवाब दे देंगी तो बड़ी आपदा में क्या होगा?
जनता का कहना है कि प्रशासन को कागजी दावों और बैठकों से निकलकर धरातल पर काम करना होगा। सिंहस्थ का ढिंढोरा पीटने से पहले आपातकालीन सेवाओं के कबाड़ बेड़े को दुरुस्त करना जरूरी है, वरना यह लापरवाही उज्जैन की साख पर भारी पड़ सकती है।
_फिलहाल नगर निगम अधिकारियों का इस मामले पर बयान नहीं आया है।_
नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी IAS संकेत भोंडवे सिंहस्थ की तैयारियों के लिए उज्जैन आते तो हैं, लेकिन गंभीरता नहीं दिखाते। आरोप है कि वे नाममात्र की खानापूर्ति कर मीटिंग के नाम पर दौरा कर चले जाते हैं। जब भी वे उज्जैन आते हैं, मीडिया से दूरी बनाकर रखते हैं। निगम के कामों की कोई जानकारी मीडिया से साझा नहीं करते और फोन भी नहीं उठाते। इससे तैयारियों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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