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काल भैरव मंदिर में नया रिकॉर्ड!5 दिन में 25 लाख से अधिक की बंपर कमाई!₹500 के प्रोटोकॉल टिकट को भक्तों ने सराहा।5 दिन में 25 लाख से अधिक की आयशनिवार को एक दिन में 9.38 लाख की आय*अब शनिवार-रविवार को आम लोगों के लिए सुविधा बंद*
उज्जैन संवाददाता मनोज राठौर : बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री काल भैरव मंदिर से राजस्व और प्रबंधन को लेकर एक हैरान करने वाली और सुखद खबर सामने आई है। मंदिर प्रशासन द्वारा हाल ही में शुरू की गई ₹500 की ‘शीघ्र दर्शन’ (प्रोटोकॉल) व्यवस्था को श्रद्धालुओं ने हाथों-हाथ लिया है। इस नई शुरुआत के महज 5 दिनों के भीतर मंदिर समिति को ₹25 लाख से अधिक की आय प्राप्त हो चुकी है।
सबसे खास बात यह है कि सशुल्क व्यवस्था लागू होने के बावजूद मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि यह आंकड़ा दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है।
ठगी पर लगाम और सुगम दर्शन
मंदिर प्रशासन के अनुसार, कई बार बाहर से आने वाले श्रद्धालु शीघ्र दर्शन कराने के नाम पर स्थानीय बिचौलियों और गाइडों की ठगी का शिकार हो जाते थे। इसी को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर और मंदिर समिति ने महाकालेश्वर मंदिर के वीआईपी दर्शन मॉडल की तर्ज पर यह कदम उठाया। अब ₹500 का आधिकारिक टिकट लेकर भक्त सीधे गर्भगृह तक पहुंच रहे हैं और बिना किसी परेशानी के बाबा काल भैरव के बेहद करीब से दर्शन कर पा रहे हैं।
*वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार*
मंदिर सूत्रों के मुताबिक समिति अब शीघ्र दर्शन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रही है। इसके तहत श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश न देते हुए बाहर से ही बिना कतार दर्शन कराए जाएंगे। इसके लिए दर्शन शुल्क करीब 250 रुपये रखने पर विचार चल रहा है। कलेक्टर की सहमति के बाद इसे जल्द लागू किया जाएगा।
छुटियो के चलते मंदिर में आने वाले श्रधालुओ की संख्या बढ़ी है ऐसे में मंदिर के व्यवस्थापक पटवारी महेश देपन अपनी पूरी टीम के साथ पूरे समय मंदिर परिसर में व्यवस्था बनाते दिखते हैं। उन्हीं की मेहनत से यह योजना सफल हुई है।
क्या है दर्शन की नई व्यवस्था?
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टिकट की कीमत: ₹500 प्रति श्रद्धालु।समय: सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक काउंटर चालू रहते हैं।कैसे होता है प्रवेश: मंदिर के बाहर बने अधिकृत काउंटर से ऑफलाइन टिकट लेने के बाद, श्रद्धालुओं को एक विशेष मार्ग से सीधे गर्भगृह के गेट तक ले जाया जाता है।सामान्य दर्शन: जो श्रद्धालु शुल्क नहीं देना चाहते, उनके लिए निःशुल्क सामान्य कतार की व्यवस्था पहले की तरह ही जारी है।-
भविष्य की योजना: फिलहाल यह व्यवस्था ऑफलाइन है, जिसे बहुत जल्द ऑनलाइन बुकिंग के साथ भी जोड़ दिया जाएगा।
सिंहस्थ 2028 को देखते हुए जहां एक तरफ मंदिर परिसर में ₹125 करोड़ से अधिक के विकास कार्य और कॉरिडोर का निर्माण चल रहा है, वहीं इस नई दर्शन व्यवस्था ने भीड़ को नियंत्रित करने में बड़ी सफलता हासिल की है।

