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26 साल की सबसे बड़ी कटौती! सऊदी अरब ने अचानक सस्ता किया कच्चा तेल, जानिए भारत की कैसे खुलेगी लॉटरी?

मुंबई  : वैश्विक ऊर्जा बाजार से इस समय की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश सऊदी अरब ने कच्चे तेल की कीमतों में एक झटके में 26 साल की सबसे बड़ी कटौती कर दी है। सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने एशियाई देशों (जिसमें भारत भी शामिल है) के लिए अगस्त डिलीवरी वाले अपने फ्लैगशिप ‘अरब लाइट क्रूड’ (Arab Light Crude) के दामों में 11 डॉलर प्रति बैरल की भारी कमी की है। 
इस बड़ी कटौती के बाद अब यह तेल ओमान-दुबई बेंचमार्क से भी 1.50 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट (सस्ते दाम) पर मिलेगा, जिसने पूरी दुनिया के एनर्जी मार्केट को हैरान कर दिया है।

 अचानक इतनी बड़ी कटौती क्यों हुई?

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कीमतों में इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:
  1. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का खुलना: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो गई है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई तेजी से बढ़ी है।
  2. OPEC+ का बड़ा फैसला: सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व वाले OPEC+ गठबंधन ने अगस्त से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त तेल उत्पादन बढ़ाने पर सहमति दी है। बाजार में सप्लाई बढ़ने और ग्राहकों को लुभाने के लिए सऊदी ने यह ‘प्राइस वॉर’ शुरू किया है।

🇮🇳 भारत को इससे कितना और क्या फायदा होगा?

भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। सऊदी अरब भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर है, इसलिए इस फैसले से भारतीय अर्थव्यवस्था को तगड़ी मजबूती मिलेगी। भारत को होने वाले प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं: 

1. आयात बिल (Import Bill) में भारी गिरावट

सस्ता कच्चा तेल मिलने से भारत का विदेशी मुद्रा पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाएगा। इससे देश का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) घटेगा और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया (INR) और अधिक मजबूत होगा। 

2. पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटने की उम्मीद

कच्चे तेल की लागत में 11 डॉलर प्रति बैरल की कमी के बाद घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कटौती की संभावना काफी बढ़ गई है। यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 71-72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बना रहता है, तो आम जनता को महंगाई से बड़ी राहत मिल सकती है। 

3. ऑयल कंपनियों (OMCs) का बढ़ेगा मुनाफा

इंडियन ऑयल (IOC), BPCL और HPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियों के लिए कच्चे माल (फीडस्टॉक) की लागत कम हो जाएगी। इससे उनके रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार होगा और उनके शेयर की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल सकती है। 

4. महंगाई पर लगेगा लगाम

तेल की कीमतें घटने से देश में माल ढुलाई (Transportation Cost) सस्ती होती है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की चीजों, फल, और सब्जियों के दामों पर पड़ता है। इससे देश की रिटेल और थोक महंगाई को कंट्रोल करने में सरकार को सीधी मदद मिलेगी। 

📊 एक नज़र में समझें नया गणित

विवरण पहले की स्थिति अब (अगस्त सप्लाई के लिए) भारत पर असर
अरब लाइट क्रूड कटौती प्रीमियम रेट पर $11 प्रति बैरल की छूट आयात खर्च में भारी बचत
बेंचमार्क प्राइस ओमान-दुबई से महंगा बेंचमार्क से $1.50 सस्ता भारतीय रिफाइनर्स की लॉटरी
ग्लोबल ब्रेंट क्रूड ऊंचे स्तर पर ~$71.7 प्रति बैरल तक गिरा भारत में तेल सस्ता होने की राह साफ

आगे क्या होगा? बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब की इस आक्रामक प्राइसिंग के बाद अब इराक और यूएई (UAE) जैसे अन्य खाड़ी देश भी एशिया के बाजार में बने रहने के लिए अपनी कीमतें घटाने पर मजबूर हो सकते हैं। इसका पूरा फायदा अंततः भारत को ही मिलेगा।

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