नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी विवाद अब निर्वाचन आयोग तक पहुंच गया है। पार्टी का बागी गुट गुरुवार को नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ के समक्ष चुनाव चिह्न और पार्टी फंड पर अपना दावा पेश करेगा।
तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 विधायकों का प्रतिनिधिमंडल आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखेगा।
बागी गुट का कहना है कि वह अपने सभी प्रस्ताव और कानूनी दस्तावेज पहले ही निर्वाचन आयोग को सौंप चुका है। अब वह आयोग के समक्ष अपनी दलीलें प्रस्तुत करेगा।
बागी गुट ने 22 जून को 30 सदस्यीय नई राष्ट्रीय कार्यसमिति और 10 सदस्यीय उप-समिति के गठन की घोषणा की थी। नई कार्यसमिति में वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था, जबकि ममता बनर्जी को इस पद से हटाने का दावा किया गया था।
बागी गुट का दावा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से 60 उसके समर्थन में हैं, जबकि 20 विधायक ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले मूल गुट के साथ हैं।
बागी गुट का यह भी कहना है कि निर्वाचन चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत आवश्यक समर्थन और मतों के आधार पर चुनाव चिह्न पर उसका दावा अधिक मजबूत है।
