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महाघोटाला: सिद्धपीठ मां बगलामुखी मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय हेरफेर, कलेक्टर ने बिठाई जांच : राम मंदिर के बाद अब एमपी का बगलामुखी मुखी मंदिर चोरी का शिकार

आगर मालवा (नलखेड़ा): अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में कथित चंदा विवाद के बीच अब मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले से आस्था को झकझोर देने वाली खबर आई है। तंत्र साधना और राजनेताओं की विशेष आस्था के केंद्र, नलखेड़ा स्थित प्राचीन मां बगलामुखी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के नकद दान, सोने और चांदी के आभूषणों के गबन का संगीन मामला उजागर हुआ है।  इस मामले के सामने आते ही मध्य प्रदेश की सियासत में भी भूचाल आ गया है और सरकार व प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आ गए हैं। 

क्या है पूरा मामला ? (लगे आरोप)

सरकारी नियमों के मुताबिक, मां बगलामुखी मंदिर की पूरी व्यवस्था आगर मालवा जिला प्रशासन के अधीन एक आधिकारिक प्रबंध समिति संभालती है, जिसके अध्यक्ष स्थानीय एसडीएम (SDM) होते हैं। मंदिर परिसर के भीतर किसी भी निजी संस्था को दान या चढ़ावा लेने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

शिकायत और साक्ष्यों के अनुसार प्रमुख आरोप:

  • समानांतर गैर-शासकीय समिति: मंदिर परिसर के भीतर पिछले दो वर्षों (2024 से) से एक अपंजीकृत और गैर-शासकीय (प्राइवेट) समिति अवैध रूप से सक्रिय थी। 
  • निजी बैंक खातों का उपयोग: यह प्राइवेट समिति मंदिर के रजत सौंदर्यीकरण और अन्य कार्यों के नाम पर श्रद्धालुओं से सीधे नकद, सोना और चांदी का दान ले रही थी। इस चढ़ावे को आधिकारिक मंदिर प्रबंध समिति के खाते में जमा करने के बजाय निजी बैंक खातों (Private Bank Accounts) में ट्रांसफर किया जा रहा था।
  • करोड़ों का गोलमाल: प्राथमिक सूचनाओं के अनुसार, बिना किसी कानूनी रसीद या बिना किसी सरकारी ऑडिट के लाखों-करोड़ों रुपये की नकदी और आभूषणों को समेट लिया गया, जिसका कोई सार्वजनिक या सरकारी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

 प्रशासनिक आदेश और साक्ष्य (सबूत)

इस घोटाले की शिकायत पुख्ता दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ जिला प्रशासन तक पहुंची, जिसके बाद आगर मालवा कलेक्टर प्रीति यादव ने तत्काल प्रभाव से कड़ा एक्शन लिया। 
जांच के सरकारी आदेश की मुख्य बातें:
  1. 3 सदस्यीय संयुक्त जांच दल का गठन: मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कलेक्टर ने एक विशेष टीम नियुक्त की है:
    • अध्यक्ष: बी.एस. सोलंकी (मुख्य कार्यपालन अधिकारी – CEO, जिला पंचायत)
    • सदस्य: मनीष सोलंकी (जिला कोषालय अधिकारी)
    • सदस्य: मिनी अग्रवाल (मुख्य नगरपालिका अधिकारी – CMO, नगर परिषद नलखेड़ा) 

  2. 7 दिन की समय सीमा: इस टीम को मंदिर परिसर का निरीक्षण करने, दान पेटियों, रसीद कट्टों, प्राइवेट समिति के बैंक खातों की कड़ियों को खंगालने और 7 दिनों के अंदर अपनी अंतिम रिपोर्ट साक्ष्यों सहित सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। 

सरकार और विपक्ष के तीखे बयान

इस खुलासे के बाद मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है: 
  • सरकार का पक्ष (संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी): मध्य प्रदेश के धार्मिक न्यास और धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने कहा, “यह गड़बड़ी मंदिर की मुख्य समिति के बाहर के कुछ लोगों ने की है। हमारी सरकार ऐसे तत्वों को बिल्कुल नहीं बख्शेगी। अवैध वसूली और गबन करने वाले ये लोग ‘राक्षस’ की तरह हैं, जांच के बाद दोषियों पर सबसे सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” 
  • विपक्ष का हमला (जीतू पटवारी और उमंग सिंघार): कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरते हुए कहा कि पहले राम मंदिर और अब सिद्धपीठ बगलामुखी मंदिर में आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है। विपक्ष ने मांग की है कि इस पूरे चंदा घोटाले की जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और भक्तों के पैसे का एक-एक हिसाब सामने आना चाहिए। 

 क्यों महत्वपूर्ण है यह मंदिर?

नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर को देश के सबसे प्रमुख और जाग्रत तांत्रिक शक्तिपीठों में गिना जाता है। यहां विशेष रूप से चुनाव के समय या संकट काल में देश के बड़े-बड़े मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राजनेता (जैसे राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे सिंधिया आदि) अनुष्ठान और शत्रु बाधा निवारण हवन कराने आते हैं। ऐसे वीवीआईपी और अति-महत्वपूर्ण मंदिर में ऐसा घोटाला सुरक्षा और प्रबंधन दोनों पर बड़े सवाल खड़े करता है।

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