सिंगरौली || जिला मुख्यालय बैढ़न स्थित वंदना अस्पताल को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस तो जारी कर दिया, लेकिन महीनों बाद भी कार्रवाई अधर में है। आरोप है कि बिना अनुमति वाले रहवासी भवन में मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। देखिए ये रिपोर्ट।
सिंगरौली के बैढ़न में स्थित वंदना अस्पताल विवादों में है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस दिया, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ी।
सबसे गंभीर आरोप अस्पताल से सटे एक भवन को लेकर है। सूत्रों के मुताबिक ये भवन मूल रूप से रहवासी मकान है, जिसमें मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।
इस पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुष्पराज सिंह का बयान भी सामने आया है। डीएचओ के मुताबिक संबंधित भवन के लिए अनुमति का आवेदन तो किया गया है, लेकिन अभी तक अस्पताल संचालन की मंजूरी नहीं मिली है।
ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि जब मंजूरी ही नहीं है तो वहां मरीजों की भर्ती किस आधार पर हो रही है? क्या स्वास्थ्य विभाग ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया?
मरीजों की शिकायतें भी सामने आई हैं। एक मरीज ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बाथरूम के सामने ही ग्लूकोज चढ़ाया गया, जहां तेज दुर्गंध थी।
वहीं दूसरा पहलू ये भी है कि जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आरबी सिंह के होने के बावजूद मरीजों को निजी अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है।
अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले में निरीक्षण कर क्या कार्रवाई करता है।
सिंगरौली के वंदना अस्पताल पर नोटिस के बाद भी कार्रवाई क्यों अटकी? बिना अनुमति रहवासी भवन में इलाज का आरोप
सिंगरौली जिला मुख्यालय बैढ़न स्थित वंदना अस्पताल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा नोटिस जारी किए जाने के कई महीने बाद भी कार्रवाई स्पष्ट नहीं है। आरोप है कि अस्पताल के बगल में स्थित एक रहवासी भवन में मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है, जबकि उस भवन को अस्पताल संचालन की अनुमति नहीं मिली है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुष्पराज सिंह ने खुद पुष्टि की है कि भवन को अभी अनुमति प्राप्त नहीं हुई है। मरीजों ने भी अस्पताल की स्वच्छता और व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। एक मरीज ने बताया कि बाथरूम के सामने ग्लूकोज चढ़ाया गया। वहीं सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ होने के बावजूद मरीजों को निजी अस्पताल जाना पड़ रहा है। मामले ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

