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ऐतिहासिक समझौता: 4 राज्यों के बीच दशकों पुराना सरदार सरोवर बांध विवाद सुलझा

नई दिल्ली:देश की जल सुरक्षा और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर स्थापित हुआ है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच नर्मदा नदी पर बनी सरदार सरोवर परियोजना को लेकर वर्षों पुराना वित्तीय विवाद हमेशा के लिए खत्म हो गया है।

इस ऐतिहासिक समझौते पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हस्ताक्षर किए।

 

क्या था पूरा मामला (विवाद की वजह)?
सरदार सरोवर बांध परियोजना का विचार भले ही पुराना हो, लेकिन 1979 में नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (Narmada Award) द्वारा पानी के बंटवारे और लागत की रूपरेखा तय की गई थी। इसके बावजूद, राज्यों के बीच वित्तीय देनदारियों और मुआवजे की गणना को लेकर गहरा मतभेद था जो पिछले 30 से 45 वर्षों से अटका हुआ था:
    • मुआवजे और डूब क्षेत्र का गणित: बांध की ऊंचाई बढ़ने के कारण मध्य प्रदेश के कई गांव और जमीन अतिरिक्त रूप से डूब क्षेत्र में आ गए थे। मध्य प्रदेश सरकार ने नए भूमि अधिग्रहण कानून और बाजार भाव के आधार पर गुजरात से 7,669 करोड़ रुपये के संशोधित मुआवजे की मांग की थी।
    • गुजरात का दावा: दूसरी तरफ, गुजरात का कहना था कि वह पुरानी दरों (2001) के अनुसार केवल 281 करोड़ रुपये ही देगा। साथ ही, गुजरात ने बांध के निर्माण और रखरखाव की लागत का हिस्सा बताते हुए मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान से कुल 7,974.86 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान की मांग की थी, जिसमें अकेले मध्य प्रदेश पर 5,516.50 करोड़ की देनदारी का दावा था। 
    • विस्थापन और पुनर्वास: बाढ़ प्रभावित और जलमग्न क्षेत्रों के नागरिकों के पुनर्वास और जमीन के मुआवजे से जुड़े कई अंतर-राज्यीय कानूनी मुद्दे लंबित थे। 


 बैठक में क्या हुआ निर्णय?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मध्यस्थता में चारों राज्यों ने अपने पुराने सभी दावों को छोड़ते हुए ‘वन-टाइम सेटलमेंट’ (एकमुश्त निपटान) का रास्ता चुना।
    1. ₹550 करोड़ का फॉर्मूला: समझौते के तहत तय हुआ है कि अब मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान सरकारें अपने सभी पुराने दावों को वापस लेंगी और निर्माण लागत व देनदारियों के बदले गुजरात सरकार को 550-550 करोड़ रुपये का एकमुश्त भुगतान करेंगी। 
    2. दावों का स्थायी अंत: इस भुगतान के बाद चारों राज्यों के बीच सरदार सरोवर परियोजना की लागत हिस्सेदारी, विस्थापन मुआवजे और लंबित भुगतानों से जुड़े सभी विवाद हमेशा के लिए समाप्त मान लिए गए हैं। 
    3. महाराष्ट्र को 10 TMC पानी: इस समझौते के तहत महाराष्ट्र को नर्मदा परियोजना से 10 टीएमसी पानी मिलने का रास्ता भी साफ हो गया है, जिसमें से 5 टीएमसी पानी सीधे उकाई बांध से लिया जा सकेगा। 


अमित शाह और मुख्यमंत्रियों का बयान

बैठक के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के पुराने जल विवाद एक-एक कर सुलझाए जा रहे हैं। पानी का उपयोग चाहे गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान या महाराष्ट्र में हो, उसका अंतिम लाभ देश के किसान और आम नागरिक को ही मिलता है। यह समझौता सहकारी संघवाद का एक स्वर्णिम उदाहरण है।” [1, 3]
इस समझौते के बाद विशेषकर राजस्थान के बाड़मेर और जालोर जैसे जल संकट वाले क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल की आपूर्ति और बेहतर होगी। वहीं चारों राज्यों की सरकारों के बीच अब भविष्य की जल परियोजनाओं पर काम करना और भी आसान हो जाएगा। [1, 2]

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