ग्रेटर नोएडा: समय दोपहर का… कलेक्ट्रेट में हमेशा की तरह फाइलों का काम चल रहा था। अधिकारी अपनी कुर्सियों पर बैठे थे। तभी डिजिटल स्क्रीन पर एक ऐसा ई-मेल चमका, जिसने पल भर में सबके होश उड़ा दिए। इस सिंगल ई-मेल में लिखा था एक ऐसा खौफनाक सच, जिसने पूरे गौतमबुद्ध नगर प्रशासनिक महकमे को हिला कर रख दिया—”DM दफ्तर को बम से उड़ा दिया जाएगा!”
पल भर में छावनी बना परिसर: आखिर क्या ढूंढ रही थीं एजेंसियां?
ई-मेल आते ही कलेक्ट्रेट की धड़कनें जैसे थम गईं। बिना वक्त गंवाए, दिल्ली-NCR की सबसे हाई-प्रोफाइल सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया तंत्र एक्टिव हो गया। देखते ही देखते पूरा परिसर ब्लैक कैट कमांडोज, बम निरोधक दस्ते (Bomb Squad) और भारी पुलिस बल के साए में आ गया।
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- सीक्रेट तलाशी: दफ्तर के उन बंद कमरों के ताले खोले गए जहां आम लोगों का जाना मना है।
- सन्नाटे में छानबीन: डॉग स्क्वाड के खोजी कुत्ते कलेक्ट्रेट के गलियारों में किसी अदृश्य खतरे को सूंघ रहे थे।
- हर कोना रडार पर: गाड़ियों की डिक्की से लेकर कलेक्ट्रेट की झाड़ियों तक, हर जगह मौत के सामान की तलाश थी।
घंटों का सस्पेंस… क्या सच में कोई खतरा था?
पूरे कलेक्ट्रेट में कई घंटों तक सांसें अटकी रहीं। हर गुजरते मिनट के साथ सस्पेंस गहराता जा रहा था कि क्या वाकई कोई बड़ा धमाका होने वाला है? जांच लंबी खिंचती गई। आखिरकार, घंटों की मशक्कत के बाद एजेंसियों को कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। सबने राहत की सांस तो ली, लेकिन हवा में तैरता हुआ एक बड़ा सवाल अभी भी सबको डरा रहा है।
कौन है स्क्रीन के पीछे का वो चेहरा?
अगर परिसर में बम नहीं था, तो वो ई-मेल महज एक अफवाह थी या किसी बड़े तूफान के आने से पहले की खामोशी? सुरक्षा एजेंसियां अब उस ‘अदृश्य’ सेंडर के डिजिटल फुटप्रिंट्स (IP Address) को खंगाल रही हैं।
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- क्या यह सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी को परखने का कोई टेस्ट था?
- या फिर इस खौफनाक ई-मेल के पीछे किसी गहरी और बड़ी साजिश का ताना-बाना बुना जा रहा है?
जवाब अभी मिलने बाकी हैं और जांच का सस्पेंस लगातार बढ़ता जा रहा है.
