घट्टिया/दिपांशु जैन. || “इस संसार में अपने मनुष्य जीवन को सुखमय बनाने के लिए बुरे और अनैतिकत कार्यों का विनाश करना होगा। तब ही हम और हमारा परिवार सुखी बनेगा। पापों के कार्य करोगे तो परमात्मा हमें कैसे सुखी बनाएंगे? अरे पापों के कार्य करने से तो मनुष्य जीवन में मोक्ष की प्राप्ति नहीं, अपितु नर्क की प्राप्ति होती है। और नर्क में परमात्मा मनुष्य जीवन में किए और अब भी कर रहे हर एक पापों का हिसाब लेता है।
साथ ही बीड़ी, सिगरेट, पान- तंबाकू, शराब, जुआ, सट्टा आदि से यह मनुष्य जीवन नहीं चलता है। यह मनुष्य जीवन तो जितना हो सके दान- पुण्य और धार्मिक आयोजनों को करने से मनुष्य जीवन चलेगा और खुद के साथ- साथ परिवार में भी सुखमय जीवन जीने का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

यह बात तहसील क्षेत्र के ग्राम दौलतपुर, झीतरखेड़ी और खेड़ा चितावलिया के मध्य स्थित अतीप्राचीन श्री डुण्डेश्वर महादेव देवनारायण महाराज मंदिर परिसर में महाशिवरात्री पर्व के निमित्त चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव एवं रूद्र यज्ञ आयोजन के अंतर्गत कथा के छटे दिन कथावाचक पं. कमलेश भईजी ने अंचल के हजारों श्रद्धालुओं को कथा का श्रवण करवाते हुए कहीं। कथा में अंचल के हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा।
सर्वप्रथम कथा के छटे दिवसीय यजमान मंदिर समिति अध्यक्ष पदमसिंह पटेल परिवार ने कथा शुरू होने से पूर्व व्यासपीठ का पूजन करते हुए कथावाचक पं. कमलेश भईजी को तिलक लगाकर छटे दिवस कथा की शुरुआत की। कथा दोपहर 12 से शाम 04 बजे तक चली। कथा में महारास, गोपीरास, कंसवध आदि के प्रसंग का वर्णन करते हुए श्रीकृष्ण- रुक्मणी विवाह बड़ी धूम-धाम से मनाया। अंचल के हजारों श्रद्धालुओं ने बड़ी शांति और सद्भावना के साथ झुमते- गाते हुए कथा का श्रवण कर आनंद लिया। कथा समापन के उपरांत भागवतजी की आरती कर महाप्रसादी बांटी गई।
