नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को मनीला में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात कर साफ कहा कि भारत और चीन के सामान्य संबंधों के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता सबसे जरूरी शर्त है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध परस्पर सम्मान, परस्पर हित और एक-दूसरे की संवेदनशीलताओं के आधार पर ही आगे बढ़ सकते हैं।
आसियान बैठकों के लिए फिलीपीन की राजधानी मनीला में मौजूद दोनों नेताओं के बीच यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बैठक के मुख्य बिंदु
*1. एलएसी पर शांति जरूरी* जयशंकर ने कहा, "सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति, सामान्य संबंधों की स्पष्ट पूर्व शर्त है। अक्टूबर 2024 से दोनों पक्ष इस उद्देश्य को सुनिश्चित करने के लिए बातचीत कर रहे हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों के मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने देना चाहिए। *2. व्यापार और आपूर्ति शृंखला पर चिंता* विदेश मंत्री ने बाजार तक पहुंच, व्यापार असंतुलन और आपूर्ति शृंखलाओं को लेकर अनिश्चितता जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि "बाजार तक निष्पक्ष पहुंच और व्यापार संतुलन बेहद महत्वपूर्ण हैं। आपूर्ति शृंखलाओं की विश्वसनीयता को लेकर भी चिंताएं हैं।" *3. संबंध सामान्य बनाने की दिशा में कदम* जयशंकर ने कहा कि अक्टूबर 2024 में कजान में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग की बैठक के बाद से संबंध धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। इस दिशा को पिछले अगस्त में तियानजिन में हुई मुलाकात से और मजबूती मिली। उन्होंने सीधी उड़ानें फिर शुरू करना, वीजा व्यवस्था को अद्यतन करना, कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा व्यापार को दोबारा आरंभ करने जैसे कदमों का स्वागत किया। *4. बहुध्रुवीय विश्व में भूमिका* विदेश मंत्री ने कहा, "स्थिर और सहयोगपूर्ण संबंध बहुध्रुवीय एशिया और बहुध्रुवीय विश्व के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।"
