- Bureau Report | Jan Samvad Express Digital
- Published: August 29, 2026
उज्जैन। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का गृह नगर उज्जैन इस समय अपराधियों की ऐशगाह और खूनी गैंगवार का अखाड़ा बन चुका है। बीते महज एक महीने के भीतर शहर के अलग-अलग कोनों में सरेआम 5 सनसनीखेज हत्याओं ने पूरी कानून व्यवस्था को आईसीयू (ICU) में धकेल दिया है।
हैरानी और चिंता की बात यह है कि मारे गए लोग सत्ताधारी पार्टी भाजपा और रसूखदार संगठनों से जुड़े थे, लेकिन इसके बावजूद खाकी का इकबाल पूरी तरह जमींदोज नजर आ रहा है।
वारदात 1: नीलगंगा में दो भाइयों की जघन्य हत्या, 4 घायल
सबसे पहला और दिल दहला देने वाला मामला नीलगंगा थाना क्षेत्र के पेशवाई मार्ग से सामने आया, जहां सरेराह खूनी खेल खेला गया। मामूली रंजिश के चलते दो भाइयों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस प्राणघातक हमले में 4 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दोहरे हत्याकांड का मुख्य मृतक भाजपा का पदाधिकारी था ओर समाज का एक सक्रिय चेहरा था। शहर के बीचों-बीच हुई इस वारदात ने पुलिस गश्त के दावों की हवा निकाल दी।
वारदात 2: मक्सी रोड लक्की ढाबे पर दोहरा हत्याकांड, करणी सेना का पदाधिकारी था एक मृतक
दूसरी सनसनीखेज वारदात चिमनगंज थाना क्षेत्र के मक्सी रोड स्थित ‘लक्की ढाबे’ पर घटी। यहां आपसी गुटबाजी और वर्चस्व की लड़ाई के चलते बदमाशों ने अंधाधुंध हमला कर दो लोगों को मौत के घाट उतार दिया। मारे गए दोनों युवक करणी सेना से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। सरेआम हाईवे किनारे ढाबों पर हो रही इस तरह की घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि अपराधियों के दिलों में पुलिस का कोई खौफ नहीं बचा है।
वारदात 3: माधव नगर के दमदमा में व्यापारी की हत्या
खूनी खेल यहीं नहीं रुका; माधव नगर थाना क्षेत्र के दमदमा इलाके में भी बदमाशों ने एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया। यहां भाजपा से जुड़े एक रसूखदार व्यापारी की सरेआम हत्या कर दी गई। वीआईपी और पॉश माने जाने वाले इस इलाके में व्यापारी की हत्या के बाद से स्थानीय व्यवसायियों में जबरदस्त आक्रोश और डर का माहौल है।
‘जनसंवाद एक्सप्रेस’ पर व्यापारियों का विस्फोटक खुलासा: “अब शहर में निकलने से लगता है डर, कब कौन चाकू अड़ा दे, भरोसा नहीं!”
शहर में फैले इस खौफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब आम जनता और कारोबारी घरों से निकलने में भी थर-थर कांप रहे हैं। ‘जनसंवाद एक्सप्रेस’ से बातचीत में शहर के कुछ बड़े व्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त पर जो खुलासा किया, वह बेहद चौंकाने वाला है।
“साहब! अब उज्जैन की सड़कों पर घूमने में भी खौफ आता है। कानून का डर तो जैसे खत्म ही हो चुका है। गाड़ी लेकर निकलो तो डर लगा रहता है कि कब, किस मोड़ पर कौन सा सिरफिरा बदमाश चलती गाड़ी के आगे आकर खड़ा हो जाए, जेब से चमचमाता हुआ चाकू निकाल ले और सरेराह वारदात को अंजाम देकर फरार हो जाए। मुख्यमंत्री का शहर होने के बावजूद हम अपनी ही दुकानों और घरों के बाहर सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।”
अपराध का गढ़ बने ढाबे: अवैध शराब का कारोबार, पुलिस मेहरबान!
आखिर इन अपराधों की जड़ कहां है? सूत्रों की मानें तो शहर और हाईवे के किनारे संचालित ढाबों पर धड़ल्ले से बिकने वाली अवैध शराब इस पूरे खून-खराबे की मुख्य वजह बन रही है। ‘लक्की ढाबे’ जैसी जगहों पर देर रात तक अपराधी किस्म के लोगों का जमावड़ा होता है, जहां अवैध शराब परोसी जाती है और वहीं से हत्या व गैंगवार की स्क्रिप्ट लिखी जाती है। इन सब अवैध धंधों की जानकारी होने के बावजूद स्थानीय पुलिस आंखें मूंदे बैठी है, जिससे साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं नीचे से ऊपर तक सांठगांठ का खेल चल रहा है।
तीखे सवाल: पुलिस कप्तान (SP) पर सवाल क्यों न उठें?
जब सूबे के मुख्यमंत्री का अपना गृह क्षेत्र ही सुरक्षित नहीं है, तो बाकी प्रदेश का क्या हाल होगा? इस खूनी तांडव और व्यापारियों के बीच फैले इस खौफ के बाद उज्जैन के पुलिस कप्तान (SP) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं:
- लाचार गश्त व्यवस्था: एक के बाद एक 5 मर्डर हो जाते हैं, बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सरेराह चाकू निकाल लेते हैं, लेकिन पुलिस की गश्त टीमें रात में क्या सोती रहती हैं?
- कप्तान की नाकामी या ढील?: मुख्यमंत्री के गृह नगर में कानून व्यवस्था चुस्त रखना पुलिस कप्तान की पहली जिम्मेदारी है, फिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं? क्या कप्तान का मातहतों पर नियंत्रण खत्म हो चुका है?
- जवाबदेही तय हो: जनता अब पूछ रही है कि क्या पुलिस का काम सिर्फ वीआईपी ड्यूटी करना रह गया है? जब आम नागरिकों और बड़े व्यापारियों की जान सुरक्षित नहीं है, तो पुलिस कप्तान पर कार्रवाई क्यों नहीं होनी चाहिए?
निष्कर्ष: कब जागेगी खाकी?
उज्जैन में फैली इस ‘क्राइम वेव’ ने साफ कर दिया है कि पुलिस का इकबाल खत्म हो चुका है। विपक्ष भी अब मुख्यमंत्री मोहन यादव के गृह नगर की सुरक्षा को लेकर सरकार को लगातार घेर रहा है। अगर अब भी पुलिस कप्तान ने कड़े कदम नहीं उठाए, सरेराह चाकूबाजी करने वालों और अवैध शराब बेचने वाले ढाबों पर सख्त एक्शन नहीं लिया, तो उज्जैन को ‘अपराध की राजधानी’ बनने से कोई नहीं रोक पाएगा।


