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सादगी की मिसाल: जब प्रोटोकॉल छोड़ आम भक्त बने उज्जैन कलेक्टर, महाकाल के स्टाफ और श्रद्धालुओं का जीता दिल

उज्जैन। रविवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर एक बेहद खास और प्रेरणादायक पल का गवाह बना। अमूमन सुरक्षा घेरे और वीआईपी ठाट-बाट में रहने वाले प्रशासनिक अधिकारियों से अलग, उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने सादगी की एक नई मिसाल पेश की।

41 डिग्री की झुलसाने वाली गर्मी में, बिना किसी सुरक्षा गार्ड और बिना किसी विशेष वीआईपी प्रोटोकॉल के, वे एक आम श्रद्धालु की तरह बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे। इस दौरान महाकाल मंदिर  प्रशासक  प्रथम कौशिक भी उनके साथ कदम से कदम मिलाकर व्यवस्थाओं को परखते नजर आए।
कलेक्टर ने अपनी गाड़ी और सुरक्षा अमले को हरसिद्धि मंदिर पर ही रोक दिया और आम भक्तों के बीच पैदल चलते हुए बड़ा गणेश मार्ग से मंदिर की ओर बढ़े। उनके इस जमीन से जुड़े अंदाज को देखकर वहां मौजूद आम लोग और मंदिर का स्टाफ हैरान भी हुआ और प्रेरित भी।

👟 कर्मचारियों का बढ़ाया हौसला, खुद लाइन में लगकर जमा किए जूते

कलेक्टर ने निरीक्षण की शुरुआत किसी वीआईपी गेट से नहीं, बल्कि आम जनता के जूता स्टैंड से की। उन्होंने आम कतार में खड़े होकर अपने जूते जमा किए। इस दौरान उन्होंने वहां तैनात मंदिर समिति के कर्मचारियों से बेहद आत्मीयता से बात की और इस भीषण गर्मी में लगातार सेवाएं देने के लिए उनकी पीठ थपथपाई। कलेक्टर के इस अपनेपन से मंदिर स्टाफ का हौसला दोगुना हो गया।
इसके बाद वे सुरक्षा चेकिंग प्वाइंट से गुजरे, जहां सुरक्षाकर्मियों ने पूरी मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभाई। कलेक्टर ने स्वयं पेयजल केंद्र पर रुककर पानी पिया और धूप से बचने के लिए की गई छायादार व्यवस्थाओं को देखा। उन्होंने विश्राम स्थलों में बैठे श्रद्धालुओं से चर्चा कर उनका हालचाल भी जाना।

🤝 जनता और प्रशासन के बीच मजबूत हुआ भरोसा

कलेक्टर रोशन कुमार सिंह के इस औचक और जमीनी निरीक्षण से मंदिर प्रशासन और आम जनता के बीच एक बहुत ही सकारात्मक संदेश गया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि जब जिले का सबसे बड़ा अधिकारी खुद धूप में तपकर हमारी परेशानियां समझने आता है, तो व्यवस्थाओं पर भरोसा और बढ़ जाता है। वहीं मंदिर समिति के स्टाफ में भी यह संदेश गया है कि उनकी मेहनत को उच्च स्तर पर सराहा जा रहा है।

फोकस पॉइंट 

  • प्रोटोकॉल का त्याग: कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने वीआईपी प्रोटोकॉल और सुरक्षा गार्ड्स को हरसिद्धि मंदिर पर ही छोड़ दिया।
  • पैदल यात्रा: 41 डिग्री की भीषण गर्मी में बड़ा गणेश मार्ग से महाकाल मंदिर तक आम जनता के बीच पैदल चलकर पहुंचे।
  • समानता का संदेश: आम श्रद्धालुओं की तरह कतार (Line) में लगकर जूता स्टैंड पर अपने जूते जमा कराए।
  • ग्राउंड जीरो पर टेस्टिंग: पेयजल केंद्रों (प्याऊ) पर खुद पानी पीकर गुणवत्ता जांची और छायादार मार्गों का बारीकी से अवलोकन किया।
  • स्टाफ का प्रोत्साहन: ड्यूटी पर तैनात मंदिर समिति के सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों से बात कर उनका उत्साहवर्धन किया।
  • सकारात्मक प्रभाव: इस कदम से आम जनता में प्रशासन के प्रति और मंदिर स्टाफ में अपनी ड्यूटी के प्रति सम्मान और भरोसा बढ़ा है।

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