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मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ और मिजोरम के बाद अब राजस्थान में भी मतदान संपन्न , बढ़ा मतदान प्रतिशत किसके पक्ष में .30 को तेलंगाना की बारी

जयपुर | देश के पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों के एलान के बाद अब तक मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ मिजोरम और अब राजस्थान में मतदान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है , अब 30 नवम्बर को तेलंगाना में मतदान होना है जिसके बाद पांचो राज्यों के परिणाम 03 दिसंबर को घोषित कर दिए जाएँगे | शनिवार 25 नवम्बर को राजस्थान में एक चरण में मतदान संपन्न करवाया गया , जहा शाम तक हुए मतदान का प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में देखा जाए तो बड़ा हुआ आया है , परिणाम में सरकार किसकी होगी इस बार का राज छुपा हुआ है हालाकि  राजस्थान के नाम में ही राज शामिल है। इस बार बात भी राज या रिवाज बदलने की ही हो रही है।

राजस्थान में वोट प्रतिशत बढ़ने से भाजपा काफी खुश है तो कांग्रेस भी अंडर करंट की ‘गारंटी’ से उत्साहित है। सबके अपने-अपने दावे हैं। राजस्थान में  25 नवंबर को हुए मतदान से कई ट्रेंड समझ आ रहे हैं। हर बार की तुलना में इस बार का चुनाव बड़ा दिलचस्प और पेचीदा था।

दिलचस्प इसलिए कि प्रदेश के इतिहास में जितने भी चुनाव हुए हैं, वो भाजपा-कांग्रेस या मुख्यमंत्री-पूर्व मुख्यमंत्री के बीच होते हैं, लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अशोक गहलोत के बीच ही मुख्य मुकाबला रहा है।

इस चुनाव में कुछ चीजें एकदम क्लियर हैं। इसे तिजारा और पोकरण सीट के मतदान प्रतिशत से समझ सकते हैं। यहां 80 प्रतिशत से अधिक मतदान से साफ है कि ध्रुवीकरण हुआ है।

दूसरा, बड़े नेताओं के सीटों पर वोटिंग प्रतिशत बढ़ने के भी 2 संकेत हैं। या तो इतना मतदान उन्हें हराने के लिए हुआ या जिताने के लिए।

गहलोत की सरदारपुरा सीट पर मतदान 2.59 प्रतिशत तक घटा है। इसका असर जीत-हार के मार्जिन पर नजर आएगा।

कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा, शांति धारीवाल, अशोक चांदना की सीटों पर मतदान के रुझान टक्कर वाले रहे हैं। यहां का परिणाम कुछ भी हो सकता है।

भाजपा में भी राजेंद्र राठौड़, वासुदेव देवनानी, सतीश पूनिया और नरपत सिंह राजवी जैसे नेताओं के परिणाम भी स्पष्ट नहीं कहे जा सकते।

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