हिमाचल प्रदेश || हिमाचल प्रदेश में भवनों के सुनियोजित निर्माण तथा आवासीय कॉलोनियों के व्यवस्थित विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में एक समग्र रीजनल प्लान तैयार किया जा रहा है। इस दिशा में प्रारंभिक चरण में प्रदेश के 6 जिलों में कार्य आरंभ कर दिया गया है जिसमें जिला चम्बा भी शामिल है। इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ आर्किटेक्ट के साथ एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों में नियमों के अनुपालना को सुनिश्चित करना है ताकि भूकंप जैसी आपदा की स्थिति में लोगों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाया जा सके।
जिला चंबा में भी निर्माण कार्यों के दौरान नियमों के उल्लंघन के कई मामले संबंधित विभाग के समक्ष आए हैं जिसे लेकर अब विभागीय स्तर पर उड़नदस्ते बनाकर कार्रवाई की जाएगी। भवनों के सुनियोजित निर्माण तथा आवासीय कॉलोनियों के व्यवस्थित विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 वर्ग मीटर तथा शहरी क्षेत्रों में 600 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले प्लॉटों पर भी टीसीपी एक्ट लागू किया जाएगा। इसे लेकर टीसीपी विभाग के अधिकारियों का एक उड़न दस्ता गठित किया जाएगा जो फील्ड में जाकर नियमों की जांच करेंगे तथा त्रुटि पाई जाने की अवस्था में आवश्यक कार्रवाई करेगा।
सरकार ने ये निर्णय भी लिया है कि भविष्य में रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए ईसी जारी करते समय पेयजल एवं सड़क सुविधा की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, पहले से निर्माणाधीन परियोजनाओं की जांच के लिए एक पृथक समिति का गठन किया गया है, जिसमें टीसीपी, जल शक्ति विभाग, हिमुडा तथा राजस्व विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील एवं आपदा संभावित क्षेत्र है। ऐसे में प्रदेशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्माण कार्यों में निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन अत्यंत आवश्यक है।
