उज्जैन | सावन माह की आज से शुरूआत हो गई है। उज्जैन में महाकाल लोक बनने के बाद सावन महीने का पहला दिन है। महाकाल मंदिर में दो महीने तक सावन उत्सव मनाया जाएगा। इस बार 50 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
महाकाल मंदिर प्रशासन का दावा है कि 40 मिनट में भक्तों को दर्शन कराए जाएंगे। भीड़ को देखते हुए चलित भस्म आरती की व्यवस्था रहेगी। 19 साल बाद इस बार अधिक मास के कारण दो महीने का सावन रहेगा। बाबा की सावन भादो मिलाकर 10 सवारिया निकलेगी, 8 सवारी सावन महीने की होगी और दो भादों माह की निकलेंगी, जो कि परम्परागत मार्ग से होती हुई शिप्रा पहुंचती हैं। इस दौरान महाकाल राजसी ठाट-बाट के साथ राजा स्वरूप में भक्तों का हाल जानने भ्रमण के लिए निकलेंगे 4 जुलाई से 11 सितंबर तक गर्भगृह में प्रवेश भी पूरी तरह बंद रहेगा।
महेश पुजारी ने बताया कि सावन महीने में भगवान महाकाल की आराधना, जप और प्रार्थना की जाती है। इस महीने में महाकालेश्वर में पांच आरती होती हैं, जिसमें सबसे खास भस्म आरती होती है। दक्षिण मुखी होने के चलते महाकाल भगवान का अलग महत्व है। सावन महीने में रोजाना खास पंचामृत भांग, चंदन, मावा, ड्रायफ्रूट, फूल और आभूषण से दिव्य श्रृंगार किया जाता है। सावन महीने में महाकाल को बेलपत्र और जल चढ़ाने का बहुत महत्व है। सावन महीना शिवजी का अति प्रिय माना जाता है। इस महीने में शिवजी की पूजन का खास महत्व है। अवंतिका नगरी में ज्योतिर्लिंग होने से इसका अधिक महत्व है। बाबा महाकाल दूरदराज से आए श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी करते हैं। महाकाल मंदिर में सावन महीने के दौरान बाबा का श्रृंगार, पूजन, आरती का भी खास महत्व है। श्रावण महीने में रोज बाबा का अलग-अलग स्वरूप में दिव्य श्रृंगार होता है।

