अहिल्यानगर (महाराष्ट्र) /फिरोज रंगरेज/ संवाददाता नाशिक : दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों के समर्थन में अब वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे भी उतर आए हैं. अन्ना हजारे ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में दो घंटे का ‘मौन आंदोलन’ कर छात्रों के प्रति अपनी एकजुटता प्रकट की.
गांधी प्रतिमा के पास धरना
अन्ना हजारे के सहयोगी दत्ता आवारी के मुताबिक, 89 वर्षीय अन्ना ने अहिल्यानगर के वाडिया पार्क स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास पूर्वाह्न 11 बजे अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया और अपराह्न एक बजे इसे समाप्त किया. प्रतीकात्मक रूप से इस जगह को ‘अहिल्यानगर का जंतर-मंतर’ नाम दिया गया था. मौन आंदोलन खत्म करने के बाद वह अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धि के लिए रवाना हो गए.
पीएम मोदी को लिखा भावुक पत्र
इस आंदोलन से एक दिन पहले, बुधवार को अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा था. पत्र में उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और लाठीचार्ज पर गहरी चिंता व्यक्त की. उन्होंने लिखा, “छात्रों पर हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरें अत्यंत पीड़ादायक हैं। सरकार को छात्रों के इस गुस्से को कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि समाज की पीड़ा और उम्मीदों के रूप में देखना चाहिए”.
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग का किया समर्थन
अन्ना हजारे ने पीएम मोदी को भेजे पत्र में यह भी कहा कि दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “यदि शिक्षा मंत्री से इस्तीफा मांग लिया जाता है, तो इससे सरकार नहीं गिर जाएगी, बल्कि सरकार का कामकाज और अधिक जवाबदेह तथा प्रभावी बनेगा”. उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह छात्रों की मांगों को धैर्यपूर्वक सुने और सकारात्मक बातचीत के जरिए इसका समाधान निकाले.
मुख्य बिंदु:
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मौन प्रदर्शन: सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में दो घंटे का मौन व्रत रखा. -
समय और स्थान: यह आंदोलन महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक चला. -
पीएम मोदी को पत्र: अन्ना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को दुखद बताया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया
