सीहोर || मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी विधानसभा क्षेत्र के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला तूल पकड़ गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार, 11 अक्टूबर को गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने इसे गरीबों के साथ अन्याय बताते हुए अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए और मुख्य सचिव से फोन पर बात की।
12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़ने का आरोप
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कोसमी गांव में बरेला आदिवासी समुदाय के 12 परिवारों के मकानों को वन विकास निगम और वन अमले की का
र्रवाई के दौरान तोड़ा गया। कार्रवाई में खेतों में खड़ी मक्का और अरहर की फसल को नुकसान पहुंचने तथा एक कुएं को मिट्टी से भर दिए जाने की बात भी सामने आई है।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे लंबे समय से यहां रह रहे थे। मकानों के टूटने के बाद परिवारों के सामने रहने और भोजन की व्यवस्था का संकट खड़ा हो गया। हालांकि, जमीन पर कब्जे की वैधता और कार्रवाई से जुड़े सभी प्रशासनिक तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
शिवराज ने मुख्य सचिव और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष को किया फोन
शिवराज सिंह
चौहान ने मौके से ही प्रदेश के मुख्य सचिव और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से फोन पर बात कर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को दी जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी।
चौहान ने आरोप लगाया कि मकान तोड़ने के साथ फसलें नष्ट करना और पानी के कुएं को मिट्टी से भरना गरीब परिवारों के साथ गंभीर अन्याय है। उन्होंने प्रभावित परिवारों को आश्वासन दिया कि उनके लिए नए पक्के मकान बनवाने तथा तब तक रहने और भोजन की व्यवस्था कराने के लिए प्रयास किए जाएंगे।
भाजपा को वोट देने वाले परिवारों के साथ अन्याय पर उठाए सवाल
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रभावित परिवार भाजपा को वोट देते रहे हैं और उनके समर्थन से पार्टी को चुनावों में जीत मिली है। उन्होंने सवाल उठाया कि वर्षों से रह रहे गरीब परिवारों के साथ इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ अधिकारियों की कार्रवाई से सरकार और मुख्यमंत्री की छवि खराब हो सकती है। यह उनका आरोप है; किसी साजिश की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
कांग्रेस ने भी सरकार को घेरा
इस मामले पर कांग्रेस ने भी प्रदेश सरकार को निशाने पर लिया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक और प्रशासनिक खींचतान के बीच आदिवासी परिवार प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, पूरे मामले में वन विभाग की कार्रवाई का आधार, जमीन की स्थिति और संबंधित अधिकारियों की भूमिका जांच के महत्वपूर्ण विषय हैं।
अब आगे क्या?
कोसमी गांव की घटना ने आदिवासी परिवारों के आवास, आजीविका और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें मुख्यमंत्री से होने वाली चर्चा, प्रभावित परिवारों को राहत मिलने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ संभावित कार्रवाई पर हैं।
प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल आवास, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था के साथ यह स्पष्ट करना भी जरूरी होगा कि कार्रवाई किन आदेशों और नियमों के तहत की गई।


