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सादगी की मिसाल: PM मोदी और CM मोहन के फैसले का असर, उज्जैन के आला अफसर 15 गाड़ियां छोड़ एक ही बस में निकले सिंहस्थ का निरीक्षण करने

नई दिल्ली / भोपाल / उज्जैन || : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक ऊर्जा संकट और ईंधन बचत को लेकर देशवासियों से की गई अपील का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। देश में वीआईपी (VIP) संस्कृति और फिजूलखर्ची पर लगाम लगाने के लिए खुद प्रधानमंत्री ने अपने सुरक्षा काफिले में 50 फीसदी तक की बड़ी कटौती की है। पीएम मोदी के इस ऐतिहासिक कदम के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी अपने काफिले का आकार छोटा कर दिया। इसी कड़ी में एक अनूठी और अनुकरणीय मिसाल पेश करते हुए उज्जैन के प्रशासनिक अधिकारियों ने भी आज सिंहस्थ-2028 के कार्यों का निरीक्षण करने के लिए अलग-अलग लग्जरी गाड़ियों को छोड़कर एक ही ट्रैवलर बस में सवार होकर दौरा किया।

पीएम मोदी ने सुरक्षा से बिना समझौता किए घटाया काफिला

ईंधन संरक्षण और देश के आयात खर्च को कम करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं से इस मुहिम की शुरुआत की है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने एसपीजी (SPG) को निर्देश देकर अपने आधिकारिक काफिले में शामिल वाहनों की संख्या को आधा कर दिया है।इसके साथ ही काफिले में नई गाड़ियां खरीदे बिना इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को प्राथमिकता देने की बात कही है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी पेश की सादगी की मिसाल

प्रधानमंत्री की इस राष्ट्रहित की अपील को अपनाते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कारकेड (काफिले) से तत्काल प्रभाव से 5 गाड़ियां कम कर दी हैं। अब सीएम का काफिला 13 वाहनों से घटकर मात्र 8 वाहनों पर सीमित कर दिया गया है। इसके अलावा राज्य में मंत्रियों के दौरों के समय निकलने वाली अनावश्यक वाहन रैलियों पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है

उज्जैन प्रशासन का बड़ा कदम : 15 गाड़ियां बंद, एक ट्रैवलर से निरीक्षण 

शीर्ष नेतृत्व से प्रेरणा लेकर उज्जैन के प्रशासनिक अमले ने भी बुधवार को एक सराहनीय कदम उठाया। सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर नियमित निरीक्षण पर निकलने वाले संबागायुक्त व सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह और कलेक्टर रौशन कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के 15 वरिष्ठ अधिकारी अपनी अलग-अलग सरकारी इनोवा और लग्जरी गाड़ियों को छोड़कर एक ही ट्रैवलर बस में सवार होकर घाट क्षेत्र पहुंचे। 
अधिकारियों ने एक साथ शिप्रा नदी के तटों पर चल रहे 29 किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र और एप्रोच रोड के निर्माण कार्यों का जायजा लिया।अधिकारियों की इस पहल से जहां हजारों रुपयों के ईंधन और सरकारी धन की बचत हुई, वहीं सड़कों पर लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी आम जनता को राहत मिली।

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