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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन का शुभारंभ: वीर दुर्गादास की छत्री के संरक्षण-विकास कार्यों का भूमिपूजन

उज्जैन || उज्जैन में आज आयोजित द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने दीप प्रज्जवलित कर किया। सम्मेलन में देश भर से लोग आए हैं। यहां वीर दुर्गादास की छत्री पर संरक्षण एवं विकास कार्यों का भूमिपूजन किया जाएगा। सम्मेलन में 12 ज्योतिर्लिंगों, मंदिर अर्थव्यवस्थाओं और उज्जैन की आध्यात्मिक शक्ति पर विशेष सत्र आयोजित होंगे। सम्मेलन पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा पर्यटन मंत्रालय और मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के सहयोग से होटल अंजुश्री में आयोजित किया जा रहा है। इस मौके पर पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक पहचान दिलाने की दिशा में कार्य हो रहे हैं। उज्जैन और ओंकारेश्वर जैसे धार्मिक स्थलों से देशभर से श्रद्धालु लगातार आ रहे हैं। उन्होंने आग्रह किया कि आगामी कुंभ मेले में PHDCCI को भी शामिल किया जाए |

उज्जैन और ओंकारेश्वर जैसे धार्मिक स्थलों पर देशभर से श्रद्धालु लगातार आ रहे हैं। उन्होंने आग्रह किया कि आगामी कुंभ मेले में PHDCCI को भी शामिल किया जाए। पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि धार्मिक टूरिज्म 20 प्रतिशत बढ़ गया है। टॉप 5 में प्रदेश के सभी धार्मिक शहर हैं। गौरांग दास उज्जैन का नाम देश के टॉप 5 शहरों में शामिल होगा। भारत की जीडीपी का 2.5% सिर्फ आध्यात्मिक टूरिज्म से आता है। सबके प्रयास से इसे बढ़ाकर 13 प्रतिशत किया जा सकता है

सम्मेलन में शामिल अतिथि और प्रतिनिधि श्री महाकालेश्वर मंदिर और काल भैरव मंदिर भी जाएंगे, ताकि उज्जैन की आध्यात्मिक विरासत का अनुभव कर सकें। इसी मौके पर पीएचडीसीसीआई-केपीएमजी की रिपोर्ट ‘आस्था और प्रवाह: भारत के पवित्र स्थलों में जनसमूह का मार्गदर्शन’ का भी विमोचन किया जाएगा। सीएम डॉ. मोहन यादव दोपहर 1 बजे वीर दुर्गादास की छत्री पर मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा किए जा रहे संरक्षण, संवर्धन और विकास कार्यों का भूमि पूजन करेंगे।

इस सम्मेलन का मकसद आगामी सिंहस्थ-2028 की तैयारियों, कॉर्पोरेट समूहों और मंदिर ट्रस्ट समूहों तक सीधी पहुंच बनाना है। इसमें देश-विदेश से आए 300 से अधिक महानुभाव, विचारक और आध्यात्मिक गुरु शामिल होंगे।

12 ज्योतिर्लिंगों और अर्थव्यवस्था पर चर्चा

कार्यक्रम में विशेष सत्र ‘ज्योतिर्लिंग सर्किट’ पर होगा, जिसमें भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों के महत्व और संरक्षण पर चर्चा की जाएगी। वहीं ‘मंदिर अर्थव्यवस्थाएं: आस्था और आजीविका का संगम’ विषय पर यह बताया जाएगा कि तिरुपति, वैष्णो देवी और काशी विश्वनाथ जैसे प्रमुख मंदिर स्थानीय अर्थव्यवस्था को किस तरह मजबूती देते हैं।

 

 

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