उज्जैन | संस्कृत रचनाधर्मिता के संवर्धन के उद्देश्य से अकादमी द्वारा होली के पावन पर्व पर संस्कृतकविसमवाय का आयोजन किया गया। अध्यक्षता वरेण्य विद्वान् प्रो.विन्ध्येश्वरीप्रसाद मिश्र वाराणसी ने की तथा विशिष्ट अतिथि इतिहासविद् डॉ.भगवतीलाल राजपुरोहित थे। इस अवसर पर आमंत्रित कवियों ने संस्कृत के अनेक छन्दों में वसन्त, होली, राष्ट्रभक्ति तथा महाकवि कालिदास पर केन्द्रित रचनाओं का सुमधुर पाठ किया। सत्र का संचालन डॉ.तुलसीदास परौहा ने किया।
कालिदास संस्कृत अकादमी के प्रभारी निदेशक डॉ.सन्तोष पण्ड्या ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि अकादमी संस्कृत रचनाधर्मिता के प्रोत्साहन के लिये कविसमवाय का आयोजन करती है। इस अवसर पर डॉ.निलिम्प त्रिपाठी भोपाल, डॉ.धर्मेन्द्र सिंहदेव पुरी, डॉ.ओमप्रकाश दुबे सीहोर, डॉ.सुभाष मालवीय देवास, डॉ.शैलेन्द्र वर्मा, सुश्री पूजा, श्री मुकेशचन्द्र भल्ला, श्री दिनेश मालवीय, श्री प्रणव कश्यप सभी उज्जैन ने संस्कृत रचनाओं का पाठ किया।
इसके पश्चात् श्री महेश निर्मल तथा साथियों ने संस्कृत के गीतों की मधुर प्रस्तुति दी। उन्होंने अपनी प्रस्तुति में लिंगाष्टक, मधुराष्टक, निर्वाणाष्टक, महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र सहित अन्य गीतों की प्रस्तुति की। साथ में सितार पर श्री दिलीप फडके, बांसुरी पर श्री प्रियांश मिश्र, हारमोनियम पर सुश्री नीता करवलकर, तबले पर पं.शैलेन्द्र भट्ट, मंजीरे पर सुश्री करुणा सिसौदिया, गायन में सुश्री कविता मेहता, साईशिखा ने संगत की। अतिथियों का स्वागत डॉ.सन्तोष पण्ड्या एवं डॉ.सन्दीप नागर ने किया।
