- राहुल गांधी-अखिलेश यादव की SIR याचिका में 14 खामियां,
- सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को नहीं हुई सुनवाई
नई दिल्ली | 13 अक्टूबर 2026 | जनसंवाद एक्सप्रेस डिजिटल
राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत विपक्षी दलों के 11 नेताओं की ओर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने के लिए दायर याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में 14 खामियां दर्ज की हैं। इनमें दस्तावेजों के कुछ पन्नों का पढ़ने योग्य नहीं होना, कुछ पन्नों का गायब होना, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की अस्पष्ट प्रति और कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी शामिल है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रजिस्ट्री की आपत्तियों के कारण याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं किया जा सका। अब याचिकाकर्ताओं को पहले बताई गई खामियां दूर करनी होंगी। यह रजिस्ट्री स्तर की प्रक्रियागत आपत्तियां हैं, याचिका के मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं।
खड़गे के पहचान पत्र की साफ कॉपी मांगी
रजिस्ट्री ने याचिका दाखिल करने वाले वकील से मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की स्पष्ट प्रति जमा करने को कहा है। इसके अलावा, रिपोर्टों के अनुसार, नौ याचिकाकर्ताओं की ओर से याचिका दायर करने के लिए जरूरी प्राधिकरण संबंधी दस्तावेज भी अधूरे हैं। दस्तावेजों में पन्नों की पठनीयता और कमी से जुड़ी आपत्तियां भी दर्ज की गई हैं।
SIR में कथित गड़बड़ियों को लेकर दायर हुई याचिका
विपक्षी नेताओं ने 12 अक्टूबर को दायर याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने और प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम भी प्रभावित हो सकते हैं। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक सुनवाई के बाद ही निकलेगा।
चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को बनाया पक्षकार
याचिका में भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा अन्य चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है। विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसलों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की जांच की मांग की है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मतदाता सूची में हुए बदलावों का स्वतंत्र ऑडिट कराने, मतदाताओं के नाम मनमाने तरीके से हटाए जाने से रोकने के लिए सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने और SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने की मांग की है। याचिका में स्वतंत्र जांच समिति गठित करने का अनुरोध भी शामिल है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल याचिका की सुनवाई में देरी का कारण रजिस्ट्री की ओर से दर्ज की गई प्रक्रियागत खामियां हैं। याचिकाकर्ताओं को आवश्यक दस्तावेजों, प्राधिकरण संबंधी औपचारिकताओं और कोर्ट फीस की कमी को पूरा करना होगा। इसके बाद याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। सुनवाई की अगली तारीख की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
राजनीतिक रूप से अहम क्यों है मामला? SIR को लेकर विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता राष्ट्रीय बहस का विषय बने हुए हैं।

