- बड़ौद में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई
- 30 हजार की रिश्वत लेते परियोजना अधिकारी और सुपरवाइजर गिरफ्तार
- आंगनवाड़ी सहायिका की नियुक्ति के बदले मांगे थे 80 हजार रुपये
- बातचीत के बाद 60 हजार में तय हुआ था सौदा
- उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने पहली किश्त लेते ही दोनों को रंगे हाथों पकड़ा
- आगर मालवा जिले में कार्रवाई से विभाग में मचा हड़कंप
आगर मालवा/बड़ौद। सरकारी नौकरी में नियुक्ति दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगने का मामला सामने आया है। गुरुवार 5 नवंबर को उज्जैन लोकायुक्त की टीम ने आगर मालवा जिले के बड़ौद में महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी और एक सुपरवाइजर को 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। दोनों पर शिकायतकर्ता की पत्नी को आंगनवाड़ी सहायिका के पद पर नियुक्त कराने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है।
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लोकायुक्त की इस कार्रवाई में परियोजना अधिकारी भगतसिंह चौहान और सुपरवाइजर जयश्री खींची को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती शिकायत में 80 हजार रुपये की मांग किए जाने की बात सामने आई थी। बाद में बातचीत के दौरान 60 हजार रुपये में सौदा तय हुआ और पहली किश्त के रूप में 30 हजार रुपये देना निर्धारित किया गया था।
पत्नी की नियुक्ति के लिए मांगी थी रिश्वत
लोकायुक्त से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम बिनायगा, बड़ौद निवासी बहादुर पिता नारायण सिंह लोहार ने 4 नवंबर को उज्जैन लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार दीक्षित के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उसकी पत्नी रामू की महिला एवं बाल विकास परियोजना में सहायिका पद पर नियुक्ति कराने के एवज में परियोजना अधिकारी भगतसिंह चौहान और सुपरवाइजर जयश्री खींची द्वारा 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी।
शिकायतकर्ता ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई तो बातचीत के बाद 60 हजार रुपये में सहमति बनी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त पुलिस से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी।
शिकायत का सत्यापन कर बिछाया जाल
शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने पहले रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि के लिए शिकायत का सत्यापन किया। आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। गुरुवार को शिकायतकर्ता को रिश्वत की पहली किश्त के रूप में 30 हजार रुपये लेकर भेजा गया।
जैसे ही परियोजना अधिकारी और सुपरवाइजर ने रकम स्वीकार की, पहले से तैयार लोकायुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों को पकड़ लिया। कार्रवाई के बाद दोनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
लोकायुक्त टीम में ये अधिकारी-कर्मचारी रहे शामिल
यह कार्रवाई लोकायुक्त संगठन के महानिदेशक योगेश देशमुख के निर्देशन में, डीआईजी मनोज कुमार सिंह तथा उज्जैन लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार दीक्षित के मार्गदर्शन में की गई।
ट्रैप दल में डीएसपी दिनेशचंद पटेल, निरीक्षक हीना डावर, प्रधान आरक्षक हितेश ललावत, आरक्षक शिवकुमार शर्मा, संदीप राव कदम, विशाल रेशमिया तथा सहायक ग्रेड-3 रश्मि माहेश्वरी और सुनीता चौधरी शामिल रहे।
नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
इस कार्रवाई के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग में नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिस पद पर नियुक्ति के लिए शासन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन और चयन होना चाहिए, उसी नियुक्ति के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया है। अब मामले की जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि नियुक्ति प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका थी।

