- देवास के खातेगांव में शराब तस्करी रोकने पहुंचे थाना प्रभारी की ट्रक से कुचलकर मौत
- सरकार का बड़ा एक्शन
- परिवार को 1 करोड़ और पत्नी को SI की नौकरी
- तीन शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित, आबकारी अधिकारी भी सस्पेंड
- ट्रक छोड़कर भागा चालक, मालिक गिरफ्तार
उज्जैन/देवास | 2 नवंबर 2026
देवास जिले के खातेगांव में अवैध शराब तस्करी रोकने की कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी दिलीप कुमार पुरी की मौत ने मध्यप्रदेश के पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात हुई इस घटना में शराब से भरे आयशर वाहन के चालक पर थाना प्रभारी को कुचलने का आरोप है। घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार ने दिवंगत थाना प्रभारी के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और उनकी पत्नी को सब इंस्पेक्टर (SI) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने का फैसला किया है। मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है और पुलिस ने वाहन मालिक को गिरफ्तार किया है।
कैसे हुआ पूरा हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार और सोमवार की दरमियानी रात करीब 1 से 1:30 बजे खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप कुमार पुरी को क्षेत्र में अवैध शराब परिवहन की सूचना मिली थी। इसके बाद वे पुलिस टीम के साथ इंदौर-बैतूल हाईवे पर खातेगांव और संदलपुर के बीच चेकिंग के लिए पहुंचे।
इस कार्रवाई में नेमावर सहित आसपास के थानों की पुलिस टीमें भी शामिल थीं। पुलिस को संदिग्ध आयशर वाहन दिखाई दिया। थाना प्रभारी ने वाहन को रुकवाकर चालक को नीचे उतरने के लिए कहा, लेकिन आरोप है कि चालक ने वाहन रोकने के बजाय उसे डिवाइडर पर चढ़ाकर आगे बढ़ा दिया।
इसी दौरान ट्रक का पिछला पहिया थाना प्रभारी दिलीप पुरी के ऊपर से गुजर गया। वे गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिसकर्मी उन्हें तत्काल खातेगांव के निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए करीब दो घंटे तक उपचार और सीपीआर के प्रयास किए, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
ट्रक छोड़कर फरार हुआ चालक, वाहन मालिक गिरफ्तार
घटना के बाद आयशर वाहन का चालक ट्रक लेकर आगे निकल गया और संदलपुर फाटे के पास वाहन छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है। वाहन का नंबर MP 43 H 4786 बताया गया है।
पुलिस ने आलीराजपुर जिले के बेहड़वा गांव से वाहन मालिक केरम सिंह को गिरफ्तार किया है। जांच में यह भी सामने आया है कि वाहन के आगे एक कार से पायलेटिंग किए जाने की आशंका है। पुलिस इस भूमिका और शराब तस्करी से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है।
ट्रक चालक की तलाश के लिए पुलिस की टीमें आलीराजपुर, झाबुआ और गुजरात तक भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हरदा जिले के टिमरनी क्षेत्र के शराब ठेकेदार और कुछ कर्मचारियों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जाने की खबर है।
सरकार और प्रशासन की ओर से अब तक क्या कार्रवाई हुई?
1. मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा ऐलान
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दिवंगत टीआई के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता।
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पत्नी को पुलिस विभाग में सब इंस्पेक्टर के पद पर अनुकंपा नियुक्ति।
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मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश।
2. स्पेशल डीजी उपेंद्र जैन को जांच की जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्पेशल डीजी उपेंद्र जैन को भोपाल से घटनास्थल भेजा गया। उन्होंने उज्जैन रेंज के एडीजी राकेश गुप्ता और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच में शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किया गया है।
3. एसआईटी का गठन
देवास एसपी आदित्य मिश्रा ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। टीम यह पता लगाएगी कि शराब कहां से लाई गई थी, किसने वाहन की व्यवस्था की थी और इस तस्करी में कौन-कौन लोग शामिल थे।
4. आयशर मालिक गिरफ्तार
अलीराजपुर जिले के बेहड़वा गांव से आयशर वाहन मालिक केरम सिंह को गिरफ्तार किया गया है। उस पर शराब से भरे ट्रक की पायलेटिंग करने और पुलिस कार्रवाई से बचाने में भूमिका निभाने का आरोप है। ट्रक चालक की तलाश जारी होने की जानकारी भी सामने आई है।
5. हरदा जिले की तीन शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित
मामले में हरदा जिले की टिमरनी क्षेत्र की दो और रहटगांव की एक शराब दुकान के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। इन दुकानों से शराब की आपूर्ति और खेप के स्रोत की जांच की जा रही है।
6. आबकारी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी निलंबित
प्रशासन ने सहायक जिला आबकारी अधिकारी अमरसिंह बघेल और दो आबकारी आरक्षकों को निलंबित किया है। यह कार्रवाई अवैध शराब के परिवहन और निगरानी में संभावित लापरवाही के मामले में की गई है।
शराब की खेप कहां से आई थी, कहां पहुंचाई जानी थी?
पुलिस जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, आयशर वाहन में 1800 लीटर से अधिक शराब बरामद हुई है। प्रारंभिक जांच में शराब का स्रोत हरदा जिले की एक वाइन शॉप बताया गया है।
वाहन में शराब छिपाने के लिए विशेष कंपार्टमेंट बनाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि शराब किसके निर्देश पर भरी गई, परिवहन के पीछे कौन लोग थे और इसका अंतिम गंतव्य कहां था।
दिलीप पुरी के पार्थिव शरीर को दिया गया सम्मान
टीआई दिलीप पुरी के निधन के बाद खातेगांव थाने में पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उनका शव धार जिले के पैतृक गांव बरमंडल ले जाया गया, जहां अंतिम संस्कार किया गया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने देवास कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से चर्चा कर मामले की जानकारी ली।
वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने घटना को लेकर सरकार और प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में शराब तस्करी का नेटवर्क प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में फल-फूल रहा है और पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यह कांग्रेस की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, जिसकी जांच से पुष्टि होना अभी बाकी है।
अब जांच में इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी
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हरदा से निकली शराब की खेप किन लोगों के माध्यम से आगे पहुंचाई जा रही थी?
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तीन शराब दुकानों की भूमिका क्या थी?
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क्या शराब तस्करी के इस नेटवर्क में अन्य जिलों के लोग भी शामिल हैं?
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वाहन चालक घटना के बाद कहां फरार हुआ?
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आबकारी विभाग को पहले से इस अवैध परिवहन की जानकारी थी या नहीं?
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क्या इस नेटवर्क को किसी प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त था?
जनसंवाद एक्सप्रेस का सवाल: खातेगांव में एक पुलिस अधिकारी अवैध शराब की तस्करी रोकने के दौरान अपनी जान गंवा चुका है। सरकार ने आर्थिक सहायता, अनुकंपा नियुक्ति, एसआईटी जांच और निलंबन जैसी कार्रवाई की है। लेकिन इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शराब की खेप के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क का खुलासा कब होगा और उसके सभी जिम्मेदार लोगों पर कब कार्रवाई होगी?

