नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर आज एक बार फिर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने भीड़ को रोकने के लिए भारी लाठीचार्ज किया, जिसमें कई छात्रों और प्रदर्शनकारियों के सिर फूट गए और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
3-लेयर बैरिकेडिंग तोड़ी, संसद थाने तक पहुंची भीड़
NEET घोटाले के विरोध में जंतर-मंतर पर करीब 30 से 35 हजार प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए थे। स्थिति को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने इलाके में 7-7 फीट ऊंची 3-लेयर की मजबूत बैरिकेडिंग की थी। हालांकि, आक्रोशित प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ के आगे यह सुरक्षा व्यवस्था बौनी साबित हुई। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स को उखाड़ फेंका और मार्च करते हुए पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने तक पहुंच गए। भीड़ को अनियंत्रित होते देख पुलिस को बल प्रयोग और लाठीचार्ज करना पड़ा।
हमें कोई नहीं रोक सकता: अभिजीत दीपके
इस तनावपूर्ण माहौल और पुलिसिया कार्रवाई के बीच CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने साफ शब्दों में कहा, “हमें अब कोई नहीं रोक सकता। हमारा संसद मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज को दबाने के लिए लाठियों का सहारा ले रही है।
सुरक्षा सख्त, 5 मुख्य मेट्रो स्टेशन बंद
इस बड़े उपद्रव और सुरक्षा कारणों को देखते हुए नई दिल्ली जिले में तुरंत प्रभाव से धारा 163 (BNSS) लागू कर दी गई है। एहतियात के तौर पर दिल्ली मेट्रो ने 5 प्रमुख स्टेशनों को बंद कर दिया है, जिनमें शामिल हैं:
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- राजीव चौक (Rajiv Chowk)
- पटेल चौक (Patel Chowk)
- केंद्रीय सचिवालय (Central Secretariat)
- जनपथ (Janpath)
- सेवा तीर्थ (Seva Tirth)
अस्पताल से सोनम वांगचुक ने रखीं 3 शर्तें
पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने अस्पताल से ही अपना अनशन तोड़ने के लिए सरकार के सामने 3 बड़ी शर्तें रखी हैं। इन शर्तों में देश की शिक्षा व्यवस्था में तत्काल सुधार और CJP के प्रतिनिधिमंडल को संसद तक जाने देने का लिखित भरोसा शामिल है।
दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस ‘चलो संसद’ मार्च के लिए प्रदर्शनकारियों को कोई आधिकारिक परमिशन नहीं दी गई थी। सुरक्षा के मद्देनजर किसी भी बाहरी व्यक्ति या भीड़ को प्रतिबंधित संसद क्षेत्र की तरफ बढ़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी। फिलहाल पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

