दौर से भोपाल और भोपाल से जबलपुर तक चलाई गई वंदे भारत ट्रेन यात्रियों की कमी से लगातार जूझ रही है। देश भर में चलाई गई 35 से ज्यादा वंदे भारत ट्रेनों में से पांच रूट पर चलने वाली ट्रेनों के यही हाल हैं। बाकी 30 में से भी 20 रूट पर वंदे भारत को अच्छी ऑक्युपेंसी (यात्री) मिल रही है। जबकि 10 में किराए को लेकर मामूली इश्यू है।
इनमें इंदौर-भोपाल और भोपाल-जबलपुर में ट्रैवल के दौरान पब्लिक को वह वैल्यू सर्विस नहीं मिल रही है, जो अन्य स्थानों पर मिल रही है। अभी सबसे ज्यादा ऑक्युपेंसी दिल्ली, बनारस व केरल में है। दिल्ली-भोपाल में भी ऑक्युपेंसी अच्छी है। केरल में दो ट्रेनें चल रही हैं। वहां तो 170 से 180% की ऑक्युपेंसी हैं। अगले साल तक स्लीपर वंदे भारत का भी संचालन शुरू हो जाएगा और यह राजधानी को रिप्लेस करेगी। इससे ट्रैवल टाइम कट डाउन होगा। नई ट्रेनों में राजधानी से बेहतर सुविधाएं दी जाएगी। यह कहना है इंदौर में आयोजित कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (CII) के कॉन्क्लेव में शामिल होने आए वंदे भारत ट्रेन के जनक सुधांशु मणि का।
