Jan Samvad Express
Breaking News
Uncategorizedअंतरराष्ट्रीयइंदौरइंदौर संभागउज्जैनउज्जैन संभागमध्यप्रदेशराजनीतिराज्यराष्ट्रीय

आजादी के बाद पहली बार मिला उज्जैन को विजन वाला जनप्रतिनिधि: प्रदेश को लगे विकास के पंख, ये है प्रदेश के विकास पुरुष

भोपाल /उज्जैन || मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में डॉ मोहन यादव के कार्यकाल को एक वर्ष पूरा हो गया है  आज ही के दिन यानी  13  दिसंबर 2023 को डॉ यादव ने मध्यप्रदेश के नए सीएम के रूप में शपथ ली थी | एमपी के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बहुमत प्राप्त किया और फिर चर्चा का दौर शुरू हो गया की प्रदेश के मुख्यमंत्री का ताज किसके सर होगा |

क्या शिवराज सिंह फिर से प्रदेश की भागदौड संभालेंगे या केंद्र से प्रदेश में विधानसभा के मैदान में उतरे दिग्गजों को प्रदेश की कमान सोपी जाएगी | सीएम की दौड़ में मीडिया खबरों में शिवराज सिंह के साथ ही कैलाश विजयवर्गी ,पहलाद पटेल ,ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे नेताओ के नाम चल रहे थे |

लेकिन केंद्र से आई पर्यवेक्षकों की टीम ने विधायक दल की बैठक में एक पर्ची पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को पढने के लिए दी जिसमे प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम लिखा था वह नाम था डॉ मोहन यादव का, जैसे मंच से नाम बोला गया खुद डॉ मोहन यादव सोच में पढ़ गए | यह फार्मूला मध्यप्रदेश के साथ ही छतीसगढ़ और राजस्थान में भी अपनाया गया और एक साथ तीन राज्य को अनसोचे मुख्यमंत्री के रूप में नए चेहरे मिले |

उज्जैन के छोटे से कार्यकर्त्ता के रूप में अपने राजनीतिक सफ़र की शुरुवात करने वाले डॉ मोहन यादव के जीवन में सफलताए बनी रही , एक बार तो विधानसभा की टिकिट भी उनके द्वारा लोटा दी गई, विकास प्राधिकरण और एमपी टूरिज्म के अध्यक्ष रहने के साथ उज्जैन  दक्षिण से तीसरी बार विधायक चुने गए डॉ. मोहन यादव जब दिसंबर में भाजपा को बहुमत मिलने के बाद विधायक दल की बैठक में जा रहे थे तब  अपने घर से भोपाल के लिए  निकलते हुए  पत्नी सीमा यादव से बोले- शाम तक कुछ अच्छा होगा। कुछ घंटे बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में उनके मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनने का ऐलान हो गया। दो दिन बाद यानी 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री ऑफिस की दीवार पर उनकी नेम प्लेट लग गई।

जाहिर है सब अचानक नहीं हुआ था, दिल्ली की नजर मोहन यादव पर पहले से थी और इधर ‘पहली पंक्ति’ के बड़े चेहरों की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर। नए मुख्यमंत्री के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती थी। पावर सेंटर्स के प्रेशर के बीच उनमें बैलेंस बनाए रखना।

उज्जैन को पहली बार मिला विकास पुरुष 

कहा जा सकता है की आजादी के बाद पहली बार उज्जैन को एक ऐसा जनप्रतिनिधि मिला इसे ऐसे ही विकास पुरुष नहीं कहा जाता आया है , डॉ मोहन यादव को प्यार से विकास पुरुष कहा जाता है , एक विजन लेकर चलते वाले डॉ यादव  एक मात्र ऐसे नेता बन गए है जो उज्जैन के लिए सोगातो के फुल उड़ा रहे है . , शायद आजादी के बाद डॉ यादव ही पहले नेता होंगे जिन्होंने उज्जैन की सूद ली , केंद्र और राज्य में नेतृत्व करने वाले तो कई नेता आए जिनके लिए ये कहावत सटीक  बैठती है ऊँची दुकान फीका पकवान इस  मुहावरे का अर्थ (Unchi Dukan Fika Pakwan Muhavare Ka Arth) होता है – दिखावा ज्यादा होना या दिखावा करना। उदाहरण के तौर पर जब कोई व्यक्ति बहुत बड़ी-बड़ी बातें हांकता है और अंदर से वैसा नहीं होता है, जैसा वो दिखता है। तो उसके लिए मुहावरे का प्रयोग होता है “ऊँची दुकान फीका पकवान”

लेकिन अब कहा जा सकता है की एक साल में ही डॉ मोहन यादव ने  जिले के पुराने नेताओ के लिए कही जाने वाली कहावत को ही उल्टा कर दिया यहाँ तो दूकान भी ऊँची है और पकवान भी मीठे

प्रदेश के मुख्यमंत्री  की कमान हाथ में आने के बाद से ही डॉ मोहन यादव ने उज्जैन के लिए हर वह सोगात देने का काम किया जिसकी जरुरत की पूर्ति कई सालो पहले हो जाना थी |

उद्योगों की बोछार :- एक समय था जब उज्जैन को उद्योग नगर के रूप में जाना जाता था यह प्रदेश ही नहीं देश की कई चर्चित और बड़ी फेक्ट्रिया और मिल हुआ करती थी , जिसमे हजारो लोगो को रोजगार मिला हुआ था , लेकिन समय के साथ उज्जैन की यह पहचान इन फेक्ट्री और मिल के बंद होने के साथ ही ख़त्म हो गई लेकिन डॉ मोहन यादव ने अब एक बार फिर उज्जैन को अपनी खोई हुई पहचान लौटाने का काम किया है , विक्रम उद्योग पूरी आज उज्जैन की रोनक बन कर लौट रही है , आज देश प्रदेश के साथ ही विदेशो की बड़ी कम्पनिया उज्जैन में इन्वेस्ट करने के लिए आ रही है , अब तक उज्जैन में 100 से ज्यादा कम्पनिया अपना काम शुरू कर चुकी है जिससे आने वाले समय में उज्जैन में रोजगार को आंधी आने वाली है |

उज्जैन के नागझिरी सोयाबिल प्लांट की जमीन पर बनी कपडा फेक्ट्री से हजारो लोगो को रोजगार मिलने के रास्ते खुले है इसी तरह इंदौर रोड पर  शुरू हुई प्रतिभा टेक्स्टाईलस भी इसका दूसरा उदहारण है |

इन्वेस्टरो का आगमन उज्जैन तक ही सिमित नहीं है यह प्रदेश के चारो कौनो तक पहुंचा है , इंदौर भोपाल जबलपुर ग्वालियर जैसे बड़े शहरो के साथ है प्रदेश के कई छोटे जिलो में भी उद्योगों को स्थापित करने के लिए डॉ मोहन यादव के द्वारा संभाग स्तर पर इन्वेस्टर मीट आयोजित की जा रही है |

सडको का जाल :- डॉ मोहन यादव के विजय के कारण आज उज्जैन और इंदौर एक होने जा रहा है आने वाले समय में इंदौर और उज्जैन के बीच का फांसला बिलकुल ख़त्म होने जा रहा है जिसका बड़ा कारन सडको के बिछ रहे जाल है , उज्जैन और इंदौर की रोड अब सिक्स लें में तब्दील होने जा रही है जिसका काम शुरू हो चूका है और जल्द ही इसका काम पूरा हो जाएगा जिसके बाद उज्जैन से इंदौर या इंदौर  से उज्जैन आने में अब 30 मिनिट का समय ही लगने वाला है , ट्राफिक कंट्रोल होने के कारण बाड़ी की रफ़्तार बढेगी और दुरी कम हो जाएगी |

इसी के साथ हालही में केबिनेट की बैठक में सिंहस्थ बायपास के नाम से एक बड़ी सड़क का प्रस्ताव पास किया गया है , जिसे सिंहस्थ में उपयोगी मानते हुए जल्द ही शुरू किया जा सकेगा और इस सड़क का काम सिंहस्थ आने से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा |

मेडिसिटी का निर्माण :- लम्बे समय से उज्जैन में मेडिकल कालेज की मांग उठ रही थी लेकिन तत्कालीन सरकारों में इसे मंजूरी नहीं मिल सकी और उज्जैन के आसपास के शहर जिले इस सोगात में बाजीमार गया और उज्जैन वंचित रहा लेकिन डॉ मोहन यादव ने उज्जैन की इस कमी को भी पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी ,

अपने एक साल के कार्यकाल में उनके द्वारा उज्जैन को दी गई ये बड़ी सोगात है, उज्जैन के पुराने जिला अस्पताल की जगह पर मेडिसिटी का भूमिपूजन हो गया है और अब इस जगह पर मेडिसिटी के काम ने भी मूर्त रूप ले लिया है यह भी सिंहस्थ तक पूरा करने का लक्ष्य माना जा रहा है | इससे उज्जैन के छात्रों को अब एम् बीबी एस की पढाई अपने ही शहर में करने का अवसर मिल सकेगा वह भी सरकारी मेडिकल कालेज में कम खर्च के साथ |

आईटी पार्क :- उज्जैन को एक और बड़ी सोगात आईटी पार्क के रूप में मिल चुकी है उज्जैन इंदौर रोड पर स्थित इंजीनियरिंग कालेज की जमीन पर आईटी पार्क का निर्माण किया जा रहा है जिसमें कई बड़ी कम्पनियों को शामिल किया जाएगा |



 

आज डॉ मोहन यादव के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा हो चूका है और इस एक वर्ष के दोरान उनके द्वारा किये गए कार्यो पर हम एक नजर डालेंगे |

1 पार्टी के लोगो से तालमेल :- डॉ मोहन यादव के लिए ये एक साल बहुत चुनोतियो भरा रहा ,18 साल की शिवराज सरकार में पार्टी के कार्यकर्ताओ को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे जनप्रतिनिधि से उम्मीदे बन गई थी ऐसे में नए मुख्यमंत्री उन कार्यकर्ताओ की कितनी सुनते है और पार्टी के कद्दावर नेताओ को नजर अंदाज कर छोटे से कार्यकर्त्ता को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद सभी को साध कर चलना तालमेल बना कर रखना डॉ मोहन के लिए बड़ी चुनोती थी |

  • कई बार चर्चा रही की डॉ मोहन यादव को कई बड़े नेता अभी भी मुख्यमंत्री मानने को तैयार नहीं लेकिन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने सीनियर नेताओ के मान सम्मान में कभी कोई कमी नहीं आने दी और सभी चर्चाओ को हवा में उड़ाते हुए अपने मिशन की और आगे बढ़ते रहे और ऐसे ही एक साल पूरा हो गया |

2 डॉ यादव  सरकार में   प्रशासनिक कसावट : सरकार की कमान सँभालते ही डॉ मोहन यादव ने प्रशासनिक कसावट पर जोर दिया और सालो से मुख्यमंत्री कार्यालय और मंत्रालय में जमे अधिकारियो में उन्हें ही अवसर दिया जो काम करने वाले है | यानी कहा जा सकता है की मोहन सरकार में काम करने वालो की कदर होगी , और काम के प्रति लापरवाही करने वालो पर गाज भी गिरी  अफसरशाही के प्रति लोगों की नाराजगी की दुखती रग को नए मुख्यमंत्री ने शुरुआत में ही समझ लिया। पहले एक महीने के दौरान ही एक संभाग आयुक्त, 9 कलेक्टर, 3 एसपी हटा दिए। नवंबर तक 22 जिलों के कलेक्टर, 39 जिलों के एसपी बदले जा चुके हैं।

  •  शाजापुर कलेक्टर को तो गलत भाषा की वजह से बदल दिया गया। कलेक्टर ने एक बैठक में ड्राइवर को औकात दिखाने की   बात कह दी थी। अगले दिन मुख्यमंत्री का बयान आया- ऐसी भाषा बर्दाश्त नहीं। थोड़ी देर बाद ही शाजापुर को नया कलेक्टर मिल गया।
  • डॉ मोहन यादव का साफ कहना है अधिकारी को अपने कर्मचारी की इज्जत करना होगी ड्रायवर हो या चपरासी अगर वह सही है और उसके बाद भी उसे सम्मान ना मिले तो कलेक्टर को भी हटाया जा सकता है |

इसी के साथ डॉ मोहन यादव ने  एक साल में प्रशासनिक कसावट के लिए कुछ प्रयोग भी किए। मुख्यमंत्री खुद संभागों में पहुंचे। सीनियर आईएएस और आईपीएस को संभागों का जिम्मा सौंपा ताकि मैदानी मॉनिटरिंग मजबूत रहे।

3 . एक साल में आए चुनावो में भी मिली सफलता : मध्यप्रदेश में डॉ मोहन यादव के सामने मुख्यमंत्री बनने के बाद एक बड़ी परीक्षा दी लोकसभा में बेहतर परफोर्मेंस देना , पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के कार्यकाल में मध्यप्रदेश से 29 में से 28 सीट पर भाजपा के सांसद थे एक छिंदवाड़ा में कांग्रेस नेता नकुलनाथ की जीत हुई थी |

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के लिए चुनौती थी- किसी तरह कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा को जीतना। हालांकि, छिंदवाड़ा के लिए भाजपा का राजनीतिक प्रोजेक्ट काफी पहले से चल रहा था लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद इसकी सीधी जिम्मेदारी संगठन और मुख्यमंत्री के हाथों में आ गई। डॉ मोहन यादव के लिए यही सीट बड़ी चुनोती थी और उन्होंने अपने कार्यकाल में 29 ही सीट पर जीत हासिल कर मध्यप्रदेश से 29 सासंदों की माला पीएम मोदी के गले में पहनाई थी जिसके बाद मोहन यादव कद केंद्र की नजर में बड़ा था |

लगातार दौरे और छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक कमलेश शाह की भाजपा में एंट्री कराकर नाथ परिवार के लिए राजनीतिक चक्रव्यूह तैयार किया। प्रयोग सफल रहा। दूसरी राजनीतिक परीक्षा अमरवाड़ा उपचुनाव थी। इसे भी आसानी से पास कर लिया।

तीसरी परीक्षा का रिजल्ट जरूर सवाल खड़े कर गया। कांग्रेस से भाजपा में आए रामनिवास रावत मंत्री बनकर भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। हालांकि, शिवराज की सीट बुधनी को जैसे-तैसे बचा लिया गया। यहां जीत का अंतर 1,04,974 से घटकर 13901 वोट ही रह गया। बुधनी की जीत ऐसी रही कि पार्टी चाहकर भी जश्न नहीं मना पाई।

कड़े  निर्णय लेने में नहीं पीछे हटते डॉ यादव 

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की एक खास बात मानी जाती है की वह उन फैसलों को लेने में पीछे नहीं हटते जो जनता के हित में होते है , ऐसे निर्णयों में भोपाल का BRTS हटाना हो या इंदौर के BRTS को हटाने का निर्णय लेना हो , या फिर इंदौर के रात्री कल्चर को ख़त्म करने की बात रही हो |

डॉ यादव ने अपने कार्यकाल में सबसे बड़ा निर्णय प्रदेश में बने RTO चेक पोस्ट को ख़त्म करके लिया था इन चेक पोस्ट पर लगातार अवैध वसूली की शिकायते मिल रही थी जिसके बाद सरकार की कमान सँभालते ही डॉ यादव ने इन्हें हमेशा के लिए बंद करने का निर्णय ले लिया |

इसी के साथ अब तक भोपाल से संचालित होने वाला धार्मिक न्यास का ऑफिस उज्जैन शिफ्ट कर नया कदम उठाया गया उज्जैन को धार्मिक राजधानी माना जाता है यह सिंहस्थ का मेला भी आयोजित होता है ऐसे में धार्मिक कार्यो से जुड़े निर्णय भी यही लिए जा सके इसे ध्यान में रखते हुए धार्मिक न्यास को उज्जैन शिफ्ट कर दिया गया |

 

उज्जैन का धार्मिक न्यास कार्यलय

Related posts

जेके सीमेंट के बाद अब अडानी ग्रुप यानी बिरला सीमेंट की फेक्ट्री शुरू होगी उज्जैन में

jansamvadexpress

केदारनाथ में बड़ा हादसा:यात्रा मार्ग पर पहाड़ी का मलबा गिरा , तीन यात्री की मौत

jansamvadexpress

सत्ता से बाहर होते ही आंध्र प्रदेश के पूर्व CM जगन मोहन रेड्डी के घर पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण किया गया ध्वस्त

jansamvadexpress

Leave a Comment

Please enter an Access Token