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कुमार विश्वास ने रामकथा में शाहजहाँ की महोब्बत की कहानी सुनाई , रामकथा में क्यों हुई ओरंगजेब शाहजहाँ की इंट्री

  • उज्जैन | मध्यप्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा उज्जैन में विक्रमात्सव का आयोजन किया जा रहा है जिसमे मशहूर कवि कुमार विश्वास की तीन दिवसीय राम कथा का आयोजन चल रहा है जिसका बुधवार को समापन था . रामकथा के पहले ही दिन कुमार विश्वास ने रामकथा में आर एस एस के खिलाफ बोल कर एक विवाद को जन्म दे दिया था जिसका परिणाम यह हुआ की संघ से जुड़े भाजपा नेताओ ने कार्यक्रम का विरोध करते हुए शहर में लगे कार्यक्रम के पोस्टरों पर लगे कुमार विश्वास के फोटो को फाड़ा और कालिख भी पोती , नतीजतन आयोजनों को दुसरे और तीसरे दिन के कार्यक्रम को बरकरार रखने पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा , अन्तत कुमार विश्वास ने अपने कहे वक्तव्य को वापस लेते हुए संघ और भाजपा नेताओ से माफ़ी मांगी |

  • जिसके बाद दुसरे दिन ,तीसरे और अंतिम दिन का आयोजन होने पर निर्णय हुआ लेकिन इसके बाद भी कुमार विश्वास मंच पर सहमे से रहे और 30 मिनिट के अपने उद्बोधन में अपने शब्दों को लेकर माफ़ी मांगते रहे |
    बुधवार को कार्यक्रम का अंतिम दिन था लेकिन अंतिम दिन में एक बार फिर कुमार विश्वास नए बवंडर को जन्म देते दिख रहे है कुमार विश्वास ने राम कथा में 30 मिनिट तक मुगल शासक ओरंगजेब शांह जहा और उनके परिवास पर ही बोले , सवाल यह की कार्यक्रम में शामिल लोग रामकथा सुनने आए थे या मुग़ल शासक की प्रेम कहानी |
    कुमार विशवास ने कहा की ओरंगजेब जो कुर्र्ता का पर्यायवाची रहा वह कविता लिखता था वह फ़ारसी में कविता लिखा करते थे शांह जहा उनके पिता तो कवि थे ही | उन्होंने अपनी महोब्बत का मकबरा बनवाया था उनकी 14 पत्नी थी वह अपनी 14 वी पत्नी के दुसरे पति थे उनकी 14 वी पत्नी अपने 12 वे बच्चे को जन्म देते हुए दिवंगत हो गई तो शांहजहा को दुःख रहा की वह पूरा प्रेम नही कर सके और उनकी याद में उन्होंने महोब्बत का मकबरा बनवाया जिसे आज ताज महल के रूप में जाना जाता है |
  • दरअसल रामकथा सुनाते सुनाते कुमार विश्वास अपने ट्रेक को बदलते हुए मुग़ल काल में पहुँच गए और रामकथा के मंच से करीब 30 मिनिट तक मुग़ल शासको की दाश्ता ही सुनाते रहे | कवि से नए नए कथा वाचक बने  डाक्कुटर कुमार  विश्वास आखिर क्यों नये नये  विवादों को जन्म दे रहे है

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