अयोध्या: रामलला के भव्य दरबार में चढ़ावे की रकम में बड़ी हेराफेरी और चोरी के आरोपों ने उत्तर प्रदेश की सियासत से लेकर धार्मिक जगत तक भूचाल ला दिया है। विपक्ष द्वारा 200 करोड़ रुपये से अधिक की चोरी के आरोपों और पूर्व अकाउंट्स इन-चार्ज के दावों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। अयोध्या दौरे के बीच सीएम योगी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि विशेष जांच दल (SIT) इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है और अगले 15 दिनों के भीतर पूरी सच्चाई देश के सामने आ जाएगी।
योगी आदित्यनाथ ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, “अपराधी चाहे कोई भी हो, उसे कतई बख्शा नहीं जाएगा। आस्था के केंद्र के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कठोरतम कार्रवाई होगी।”
चोरी का तरीका: पहले CCTV फुटेज डिलीट किए, फिर हुआ ‘खेल’
SIT की अब तक की जांच में कई चौंकाने वाले और विस्फोटक खुलासे हुए हैं:
डिलीट किया गया CCTV डेटा: जांच में सामने आया है कि चढ़ावे वाले रूम की सख्त पहरेदारी और कैमरों के बावजूद पिछले 8 महीनों का सीसीटीवी फुटेज डिलीट किया गया था, ताकि चोरी को छुपाया जा सके।कर्मचारी के घर गोबर के ढेर से कैश बरामद: दान-पात्र की गिनती से जुड़े एक कर्मचारी लवकुश मिश्रा को हिरासत में लिया गया है। छापेमारी के दौरान उसके घर में अलमारी और गाय के गोबर के ढेर के नीचे छुपाकर रखे गए करीब 10 लाख रुपये बरामद किए गए हैं।रडार पर 50 से अधिक कर्मचारी: इस पूरे नेक्सस में दान की रकम गिनने वाले करीब 50 कर्मचारी और बैंक टीम के कुछ सदस्य जांच के घेरे में हैं। संदिग्धों से अब तक गाड़ियां, आईफोन और भारी मात्रा में नकदी जब्त की जा चुकी है।
विपक्ष हमलावर: आप और सपा ने सरकार को घेरा
इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है:
- आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राम मंदिर के डोनेशन बॉक्स से 200 करोड़ से ज्यादा की राशि गायब की गई है, जो करोड़ों रामभक्तों की आस्था का अपमान है।
- समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर योगी सरकार की सुरक्षा और पारदर्शिता व्यवस्था पर कड़े सवाल उठाए हैं
संत समाज में भारी नाराजगी; नृपेंद्र मिश्रा ने दी ‘तिरुपति मॉडल’ की सलाह
चोरी के आरोपों पर देश के प्रमुख संतों और शंकराचार्यों ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। संतों का कहना है कि राम मंदिर पवित्रता का प्रतीक है और यहां पाई-पाई का हिसाब पारदर्शी होना चाहिए।
वहीं, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने मंदिर प्रबंधन में बड़े सुधारों के संकेत दिए हैं। उन्होंने इस विवाद के बीच सुझाव दिया है कि भविष्य में ऐसी किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए अयोध्या राम मंदिर का प्रबंधन और चढ़ावे की व्यवस्था ‘तिरुपति बालाजी मंदिर मॉडल’ की तर्ज पर पूरी तरह कंप्यूटरीकृत और अत्यधिक सुरक्षित की जानी चाहिए।
