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शहर में ई रिक्शा से बिगडती यातायात व्यवस्था : रूट निर्धारण ही आखरी विकल्प नई बिक्री पर रोक संभव नहीं , लेकिन नई गाडियों को तय रूट पर संचालन संभव

उज्जैन | धार्मिक नगरी उज्जैन में बढ़ते श्रधालुओ के आंकड़े को देखते हुए शहर के लोगो को एक रोजगार तो मिला है लेकिन वह शहर की परेशानी भी बनता जा रहा है , उज्जैन में महाकाल मंदिर के विस्तार के बाद शहर में जिस तरह से बाहर से आने वाले श्रधालुओ की संख्या मी इजाफा हुआ है इससे यह के स्थानीय रहवासियो को ई रिक्शा सञ्चालन , होटल सञ्चालन ,रेस्टोरेंट सञ्चालन जैसे रोजगार प्राप्त हुए है लेकिन एक ई रिक्शा सञ्चालन ही है जो काफी बड़े स्तर पर शहर में फ़ैल गया है , उज्जैन के करीब 4 हजार से अधिक लोगो के द्वारा ई रिक्शा का सञ्चालन किया जा रहा है कोई निजी गाडी चला रहा है तो कोई भाड़े की गाडी लेकर चला रहा है | और हर कोई कमाई का जरिया महाकाल मंदिर को मान कर चलता है , सुबह रेलवे स्टेशन हो या बस स्टेशन ई रिक्शा चालको का जमावड़ा देखने को मिल जाता है और यह जमावड़ा दिन से लेकर रात तक बना रहता है |

और इसी दोरान सबसे ज्यादा शहर में ट्राफिक का रस रहता है रेलवे स्टेशन बस स्टेशन महाकाल मंदिर , गुदरी चौराहा,हरसिद्धि मंदिर , देवास गेट , महाकाल लोक मुख्य द्वार ये वह इलाके है जहा यातायात पुरे समय बाधित रहता है , जिसका कारण ई रिक्शा चालको का सबसे अधिक इस इलाके में प्रवेश करना |


                                 एक साल पहले लगी थी नए वाहन बिक्री पर रोक , कोर्ट से राहत लाए थे विक्रेता                        

तत्कालीन कलेक्टर द्वारा एक वर्ष पूर्व ई रिक्शा से बिगढ़ते हालात को देखते हुए नई ई रिक्शा की बिक्री पर रोक लगा दी थी और रजिस्ट्रेशन भी बंद कर दिए थे ताकि शहर में पहले से मोजूद ई रिक्शा को लेकर कुछ प्लान बनाया जा सके , लेकिन यह फार्मूला ज्यादा समय तक संभव नहीं हो सका और ई रिक्शा विक्रेता कोर्ट से स्टे ले आए और फिर बिक्री शुरू हो गई और मजबूरन परिवहन विभाग को भी रजिस्ट्रेशन को शुरू करना पढ़ा |


नए वाहन पर रोक संभव नहीं –कलेक्टर उज्जैन                                                

शहर में बढ़ते ई रिक्शा को ध्यान में रखते हुए नए ई रिक्शा पर रोक लगाने के सम्बन्ध में प्रशासन के द्वारा कोई कदम उठा पाना संभव नहीं है , जिला कलेक्टर नीरज कुमार सिंह का कहना है की किसी भी वाहन की बिक्री पर रोक नहीं लगाई जा सकती उनके संचालन पर के मापदंड तय किये जा सकते है , शहर में नए जो भी ई रिक्शा विक्रय होंगे उनके लिए झोन तय किये जा सकेंगे | जिन झोन में पुराने ई रिक्शा चल रहे है उन झोन में नए ई रिक्शा का संचालन प्रतिबंधित किया जाएगा |

                                             ई रिक्शा संचालन के लिए रूट तय करना ही समाधान                                              

 

पूर्व में उज्जैन में एक स्थान से दुसरे स्थान जाने के लिए टेक्सी के रूप में टेम्पो का संचालन होता था जिन्हें परिवहन विभाग के द्वारा रूट में विभाजित किया हुआ था जिससे कई हद तक यातायात व्यवस्था को संभाला जा सकता था , शहर में टेम्पो के संचालन बंद होने के बाद मेजिक का संचालन शुरू हुआ उन्हें भी टेम्पो के रूट के हिसाब से संचालित किया जाने लगा | ई रिक्शा की बढती संख्या को देखते हुए प्रशासन के पास रूट निर्धारण ही एक मात्र विकल्प है जिससे शहर की ट्राफिक व्यवस्था को संभाला जा सकता है |

                                             बदलते दौर के साथ बदलते गए विकल्प                                                                       

 

बदल्रते समय के साथ शहर में सीएनजी ऑटो शुरू हुए और फिर बदलती तकनीक के साथ सिंहस्थ 2016 के दोरान शहर में ई रिक्शा का संचालन शुरू हुआ लेकिन वह उस दोरान सिमित मात्रा में हुआ करता था , लेकिन इधन और गेस के बढ़ते दाम के बाद लोगो का रुझान इलेक्ट्रिक विकल्प पर गया और फिर शहर में महाकाल लोक निर्माण के बाद बढती भीड़ को देख धीरे धीरे कर ई रिक्शा का संचालन बढ़ा जो एक जाल की तरह शहर में फेल गया | आज उज्जैन में 4 हजार से अधिक ई रिक्शा है और इतनी ही संख्या में CNG और पेट्रोल से संचालित होने वाली ऑटो रिक्शा भी है |


इनका कहना ......


शहर में ई रिक्शा के लिए झोन तय किए जा रहे है साथ ही अगर नए वाहन आते है तो उन्हें पहले से तय झोन में जगह नहीं दी जाएगी , नए वाहन की बिक्री पर रोक लगाना सम्भब नहीं है सिर्फ झोन और रूट निर्धारण से ही नियंत्रण किया जा सकता है 


नीरज कुमार सिंह कलेक्टर उज्जैन

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