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“भारतीय वेदों में कृषि के विविध आयामों का वर्णन है”–अखिलेश पांडे

महिदपुर।शासकीय महाविद्यालय में “भारत में सतत कृषि विकास: चुनौतियां और संभावना” विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एसके पांडेय के मुख्य आतिथ्य में हुआ। इस अवसर पर कुलसचिव विक्रम विश्वविद्यालय डॉ प्रशांत पुराणिक, प्रोफेसर जीएम दुबे, विक्रम विश्वविद्यालय की अर्थशास्त्र अध्ययनशाला के डॉ. एस के मिश्रा, महिदपुर के डॉ आर.सी. ठाकुर अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। स्वस्ति वाचन एवं सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। तत्पश्चात महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ आशा सक्सेना ने स्वागत भाषण दिया। कुलपति प्रोफेसर पांडेय ने कहा कि “भारतीय कृषि प्राचीनकाल से ही महत्वपूर्ण रही है और अब तो कृषि को विज्ञान माना जाता है अतः आवश्यकता इस बात की है कि हमें कृषि की प्राचीन काल से प्रचलित जैविक पद्धति का पुनः विकास करना चाहिए।” राष्ट्रीय संगोष्ठी के सारस्वत अतिथि डॉ प्रशांत पुराणिक के अनुसार भारतीय कृषि की जटिल प्रकृति के कारण कृषि में विभिन्न समस्याएं आ रही हैं और इन समस्याओं का समाधान व्यावहारिक स्तर पर ही संभव है। पुरातत्वविद डॉ. आर.सी. ठाकुर ने अपने उद्बोधन में बतलाया कि यूनानी शासक भारतीय कृषि से अत्यंत प्रभावित थे। इसका विवरण यूनानी मुद्रा में देख जा सकता है। राष्ट्रीय संगोष्ठी उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष प्रोफेसर जी. एम. दुबे ने बताया कि आर्थिक विकास का मुख्य घटक कृषि है और कृषि के बिना आर्थिक विकास संभव नहीं हो सकता अतः कृषि पर ही सबसे अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। इस अवसर पर डॉ वंदना मंडलोई के द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। बीज वक्तव्य प्रदान करते हुए डॉ. एस. के. मिश्रा ने बताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे शक्तिशाली आधार कृषि है। आज के समय में जब भारत के सभी पड़ोसी देश आर्थिक रूप से बदहाल हो गए हैं तब भी भारत की अर्थव्यवस्था कृषि के कारण खुशहाल बनी हुई है। भोजनावकाश पश्चात प्रो. तपन चौरे प्रबोधन व्याख्यान हुआ जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में प्रो.गिरीश मोहन दुबे ने कहा कि तपन चौरे ने जिन उपलब्धियों के साथ अपना संक्षिप्त जीवन जिया वह हमें प्रेरणा देता है। उनमें नेतृत्व क्षमता जन्मजात थी। तपन जी स्पष्टवादी थे। उनके स्मरण में यह प्रबोधन जड़ों की ओर लौटने वाला प्रबोधन है। श्री दुबे ने मोटे अनाज उत्पादन के बारे में शोध प्रस्तुत किया। इस अवसर डॉ नीता तपन अतिथि सम्मान किया राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ प्रभाकर मिश्रा, आभार डॉ सुमन जैन के द्वारा व्यक्त किया गया तथा प्रबोधन व्याख्यान का संचालन डॉ रीना अध्वर्यु ने किया। आभार डॉ धीरेन्द्र केजरीवाल (प्राध्यापक अर्थशास्त्र, शासकीय महाविद्यालय कायथा ने माना।

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