सिंगरौली। जिला मुख्यालय की यातायात व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। यातायात थाने से महज 3 से 4 किलोमीटर के दायरे में ही कई जगहों पर जाम, अव्यवस्थित पार्किंग और नो-एंट्री में भारी वाहनों की एंट्री की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नए यातायात थाना प्रभारी के पदभार ग्रहण करने के बाद भी व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा है।
विशाल मेगा मार्ट और V2 के सामने लंबी कतारें
शाम होते ही विशाल मेगा मार्ट और V2 मॉल के सामने सड़क किनारे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। बेतरतीब पार्किंग के कारण आवागमन बाधित होता है और हादसे का खतरा बना रहता है। कई बार तो जाम में एंबुलेंस तक फंस जाती है।
गनियारी में नो-एंट्री का उल्लंघन, हाईवा ने बाइक को मारी टक्कर
सबसे गंभीर मामला गनियारी क्षेत्र का है। आरोप है कि नो-एंट्री के दौरान भी हाईवा और अन्य भारी वाहन बेरोकटोक निकल रहे हैं। हाल ही में एक हाईवा ने बाइक को टक्कर मार दी थी। सवाल उठता है कि नो-एंट्री की मॉनिटरिंग कौन कर रहा है और नियम तोड़ने वालों पर कितनी कार्रवाई हो रही है?
सड़क पर खड़े वाहनों से हादसे का खतरा
जिले में सड़क पर खड़े वाहनों के कारण दो डॉक्टरों के वाहनों में टक्कर की घटना का भी जिक्र सामने आ रहा है। हालांकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी, लेकिन अव्यवस्थित पार्किंग को लेकर लोगों में आक्रोश है।
अंबेडकर चौक से कचहरी तक जाम
अंबेडकर चौक पर ऑटो चालकों द्वारा मुख्य सड़क पर ऑटो खड़ा करने से जाम की स्थिति बनती है। वहीं सत्र न्यायालय के सामने भी यही हाल है। यातायात थाने से कुछ ही दूरी पर एक कार चालक द्वारा बाइक सवार को रोकने के बाद मौके से भाग जाने का मामला भी चर्चा में है। लोगों की नजर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है।
फ्लैग मार्च बनाम जमीनी हकीकत
एक तरफ यातायात पुलिस फ्लैग मार्च और जागरूकता अभियान चला रही है, दूसरी तरफ शहर की सड़कें जाम, अतिक्रमण और नो-एंट्री उल्लंघन से जूझ रही हैं। इससे पुलिस के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है।
अब सवाल यही है कि जिला मुख्यालय में ही जब नियमों का पालन नहीं हो पा रहा है, तो जिम्मेदार कौन है? क्या कार्रवाई सिर्फ जागरूकता तक ही सीमित रहेगी या नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी? जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के ठोस कदमों का इंतजार है।


