नई दिल्ली: घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में बदलाव न होने और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की तेजी के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (OMCs) का संकट गहरा गया है। रेटिंग एजेंसी ICRA की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर रोजाना करीब 530 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रति लीटर और सिलेंडर पर हो रहा इतना घाटा
रिपोर्ट के अनुसार, देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL), और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) को हर स्तर पर अंडर-रिकवरी (लागत से कम पर बिक्री) का सामना करना पड़ रहा है:
- पेट्रोल: प्रति लीटर करीब ₹8 का नुकसान।
- डीजल: प्रति लीटर करीब ₹9 का नुकसान।
- रसोई गैस (LPG): सितंबर महीने में प्रति घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर कंपनियों को करीब ₹300 का घाटा उठाना पड़ रहा है।
क्या है इस भारी घाटे की मुख्य वजह?
- क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड) के दाम लगातार तेज हो रहे हैं, जिससे कंपनियों के लिए कच्चे माल की लागत बढ़ गई है।
- घरेलू कीमतों का स्थिर रहना: लागत बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में काफी समय से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की खुदरा कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। लागत और बिक्री मूल्य के बीच का यह बढ़ता अंतर ही कंपनियों के दैनिक घाटे की मुख्य वजह है।


